जयपुर के एक महाविद्यालय में परीक्षा के दौरान 23 वर्षीय महिला को उसके आठ महीने के बच्चे को स्तनपान कराने की अनुमति नहीं दी गई। महिला के पति ने बताया कि अधिकारियों ने उसकी पत्नी को परीक्षा के दौरान स्तनपान कराने की अनुमति नहीं दी।
बस्सी के पास एक गांव की रहने वाली निर्मला कुमारी शुक्रवार को एसएस जैन सुबोध पीजी महिला महाविद्यालय में इतिहास विषय की सप्लीमेंट्री परीक्षा दे रही थी। परीक्षा सुबह की पाली में सात से 10 बजे के बीच आयोजित हुई। निर्मला के पति कालू नाम बैरवा और आठ महीने की बच्ची इस दौरान कॉलेज परिसर के बाहर ही रहे।
बैरवा ने कहा कि उसकी बच्चे भूख के मारे रो रही थी और वह अपनी पत्नी का इंतजार कर रहा था। उसने कहा कि ड्यूटी कर रहे गार्ड से उसने अनुरोध भी किया कि उसे अंजर जाने दे जिससे वह अपनी पत्नी के लिए बच्चे को दूध पिलाने की अनुमति मांग सके।
बैरवा ने कहा, 'जैसे ही गार्ड ने मुझे अंदर जाने दिया, मैंने एक महिला को देखा, मुझे लगा वह कोई लेक्चरर हैं और मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं किसी ऐसे व्यक्ति से मिल सकता हूं जो मुझे इसकी अनुमति दे सके। उन्होंने कहा कि कॉलेज में इसकी अनुमति नहीं है और मुझे बाहर जाने को कहा।'
बैरना के अनुसार, 'पास में खड़े कुछ लेक्चरर ने मुझे बताया कि जिस महिला ने मुझे बाहर जाने को कहा है वह कॉलेज की वरिष्ठ अधिकारी है और उन्होंने ऐसा कहा है तो मुझे बाहर जाना ही पड़ेगा।' इसके बाद बैरवा कॉलेज परिसर से बाहर आ गया और अपनी पत्नी का इंतजार करने लगा। बच्ची अपनी मां से तभी मिल सकी जब 10 बजे परीक्षा खत्म हुई।
हमने नियम से काम किए, हमारी गलती नहीं : कॉलेज प्रशासन
हालांकि, कॉलेज की प्रधानाध्यापिका डॉ. प्रमिला जोशी का कहना है कि कॉलेज ने नियमों के हिसाब से कार्य किया है और उप प्रधानाध्यापिका ने बच्ची और उसके पिता के साथ बहुत सहानुभूति से बात की। उन्होंने कहा, 'नियमों के मुताबिक परीक्षा शुरू होने के बाद परीक्षार्थी किसी से भी नहीं मिल सकता। परीक्षा कक्ष के बाहर के किसी व्यक्ति से तो बिलकुल नहीं। हमने नियमों का पालन किया और इसीलिए हमारी गलती नहीं है।'