जानकारी के मुताबिक, सचिन पायलट ने एक अंग्रेजी अखबार को इंटरव्यू दिया। उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जताई और कहा कि 10 महीने हो गए, लेकिन उनसे किए वादे पूरे नहीं हुए। पायलट ने कहा, 'मुझे समझाया गया था कि सुलह कमेटी तेजी से एक्शन लेगी, लेकिन आधा कार्यकाल निपट गया और मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए रात-दिन मेहनत की। अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, उनकी सुनवाई नहीं हो रही।'
सचिन पायलट के बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि मैंने वह कमेटी नहीं बनाई। वह आलाकमान की कमेटी है। यह मेरे क्षेत्राधिकार का विषय नहीं है। जब आलाकमान कोई कमेटी बनाते हैं तो उस पर आलाकमान ही टिप्पणी कर सकते हैं। मैं सभी नेताओं से बात करता हूं, लेकिन जवाब उसका ही दूंगा, जो मेरे क्षेत्राधिकार में है।
सचिन पायलट के इस बयान के बाद भाजपा को कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधने का मौका मिल गया। ऐसे में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सीएम अशोक गहलोत पर निशाना साधा। सतीश पूनिया ने कहा कि यह कांग्रेस के घर का झगड़ा है, लेकिन इससे राजस्थान की जनता का अहित हो रहा है। कांग्रेस के भीतर चल रहे झगड़े के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा को दोषी ठहराया था, लेकिन हकीकत प्रदेश की जनता के सामने है। वहीं, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि आखिर मन का दर्द होठों पर आ ही गया। ये चिंगारी कब बारूद बनकर फूटेगी, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने अहम भूमिका निभाई थी। सुलह कमेटी के पास मुद्दे अब भी अनसुलझे ही हैं। न जाने कब क्या हो जाए?
भाजपा को कांग्रेस पर हावी होते देख सचिन पायलट ने पलटवार किया। उन्होंने राजेंद्र राठौड़ के ट्वीट के जवाब में लिखा कि प्रदेश के भाजपा नेताओं को व्यर्थ बयानबाजी की बजाय अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आपसी फूट व अंतर्कलह इतनी हावी है कि राज्य में भाजपा विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा पा रही। इनकी नाकाम नीतियों से देश में उपजे संकट में जनता को अकेला छोड़ने वालों को जनता करारा जवाब देगी।