राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों में उम्मीदवारों के प्रचार और चुनावी खर्च को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। नियमों के तहत विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवार अधिकतम एक लाख से तीन लाख रुपये तक ही राशि खर्च कर सकेंगे। चुनावी शक्ति प्रदर्शन और भीड़ पर रोक लगाने के लिए प्रचार में वाहनों के प्रयोग की सीमा भी एक से तीन वाहन तक तय कर दी गई है।
यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करता है, बिना अनुमति बैनर-पोस्टर लगाता है अथवा रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का उपयोग करता है तो उसके खिलाफ दो हजार रुपये जुर्माना लगाने और छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि छह साल बाद हो रहे इन चुनावों में प्रत्याशियों को हर कदम नियमानुसार ही उठाना होगा।
चुनावी खर्च और वाहनों के मानक
राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में पदों के अनुसार अलग-अलग खर्च सीमा निर्धारित की है। जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपने प्रचार अभियान में अधिकतम तीन लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। वहीं पंचायत समिति सदस्य के लिए यह सीमा डेढ़ लाख रुपये रखी गई है, जबकि सरपंच पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए अधिकतम एक लाख रुपये की चुनावी खर्च सीमा तय की गई है।
प्रचार के दौरान वाहनों के उपयोग पर भी कड़े अंकुश लगाए गए हैं। चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी अनियंत्रित रूप से गाड़ियों का काफिला नहीं निकाल सकेंगे। जिला परिषद सदस्य पद के प्रत्याशी प्रचार के लिए अधिकतम तीन वाहनों का ही प्रयोग कर सकते हैं। पंचायत समिति सदस्य के उम्मीदवार केवल दो वाहनों और सरपंच पद का चुनाव लड़ने वाले दावेदार केवल एक वाहन का उपयोग कर पाएंगे। चुनावी रैलियों और प्रचार में बस, ट्रक, मिनी बस और पशु-चालित वाहनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। आयोग का मानना है कि इस कदम से चुनाव में गैर-जरूरी तामझाम और वाहनों की अनुचित भीड़भाड़ पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
प्रचार के तरीके और समय संबंधी निर्देश
आयोग ने ध्वनि विस्तारक यंत्रों और प्रचार सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर अथवा ध्वनि विस्तारक यंत्र के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उम्मीदवारों को अपने प्रचार कार्यक्रम की योजना बनाते समय इस समय-सीमा का कड़ाई से ध्यान रखना होगा। इसके अतिरिक्त अस्पताल, विद्यालय और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में भी लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रचार के लिए पोस्टर, बैनर या होर्डिंग लगाने में भी मनमानी नहीं की जा सकेगी। सार्वजनिक स्थानों अथवा किसी निजी संपत्ति पर प्रचार सामग्री चिपकाने या टांगने से पूर्व संबंधित स्थानीय प्रशासन अथवा मकान मालिक से लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुचारू बनाए रखने के लिए मतदान केंद्र के 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री लगाने अथवा वितरित करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
वित्तीय लेखा-जोखा और दंडात्मक प्रावधान
चुनाव मैदान में भाग्य आजमा रहे उम्मीदवारों को केवल तय सीमा में खर्च करने तक ही सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि चुनाव समाप्ति के उपरांत इसका प्रामाणिक लेखा-जोखा भी प्रस्तुत करना होगा। आयोग के निर्देशों के अनुसार चुनावी नतीजे घोषित होने की तिथि से 15 दिन के भीतर सभी प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा संबंधित प्राधिकारी को सौंपना आवश्यक है। आयोग की इस पहल का ध्येय चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और शुचिता बनाए रखना है। जो प्रत्याशी आयोग द्वारा तय नियमों की अनदेखी करेंगे अथवा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।