राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नए मंत्रिमंडल के कार्यभार संभालने से पहले कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटा दिया है। भाजपा ने करणपुर सीट से उपचुनाव लड़ रहे अपने प्रत्याशी सुरेंद्रपाल सिंह टीटी को मतदान से पहले ही कैबिनेट मंत्री बना दिया। कांग्रेस ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए रविवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रवीण गुप्ता को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन देने वालों में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने करणपुर से सुरेंद्रपाल सिंह टीटी को मंत्री पद की शपथ दिलाने के मामले में कार्रवाई करने की मांग की है। करणपुर सीट पर 5 जनवरी को उपचुनाव होने हैं। इस संबंध में लोढ़ा ने कहा कि जिस विधानसभा में उपचुनाव हो रहा है वहां किसी भी तरह की वित्तीय सहायता, चुनावी वादे, उद्घाटन या निर्माण किए जाना या मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किसी भी तरह की निुयक्ति की जाना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है।
ज्ञापन के प्रत्युत्तर में भाजपा की तरफ से पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 164 (4) में निहित प्रावधानों के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना निर्वाचित हुए 6 माह तक मंत्री पद धारण करने का अधिकार है। इस संवैधानिक प्रावधान के अनुसार मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल द्वारा किसी भी व्यक्ति को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। उसके बाद 6 महीने के अंदर उसे विधानमंडल का सदस्य निर्वाचित होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संविधान की तीसरी अनुसूची के अनुसार, ली गई शपथ किसी प्रकार की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। पूर्ववर्ती सरकार में भी मंत्री पद पर रहते हुए दर्जनों मंत्रियों ने चुनाव लड़ा है। इसलिए सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी की राज्यमंत्री के रूप में ली गई शपथ संविधान के प्रावधानों के अनुरूप ही है।