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मस्जिद में बच्चों के घुसने पर प्रतिबंध, कब्रों के बीच बैठकर कर रहे पढ़ाई

Thu, 28 Jul 2016 06:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कब्रों के बीच बैठकर पढ़ते बच्चे - फोटो : times of india
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यह सुनने में बेशक डरावना लगे लेकिन राजस्‍थान के धौलपुर में एक कथित मदरसा कब्रिस्तान में ही चल रहा है। उसमें पढ़ने वाले 30 से ज्यादा बच्चे कब्रों के बीच मिट्टी में बैठकर ही अपनी तालीम ले रहे हैं। हालांकि कब्रिस्तान के बराबर में ही एक मस्जिद भी है जहां मदरसा चल सकता है लेकिन वहां बच्चों के घुसने पर प्रतिबंध है नतीजतन बच्चों को कब्रिस्तान में ही बांस के पेड़ पर टंगे एक ब्लैक बोर्ड के सहारे अपनी पढ़ाई करनी पड़ती है। 
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार पिछले 13 सालों से ये सिलसिला बदस्तूर चला आ रहा है। जहां बच्चों को अपनी चप्पलें कब्रिस्तान के गेट पर ही उतारनी पड़ती हैं। इसके बाद ही वह तालीम लेने के लिए अंदर आते हैं। 

बच्‍चों को अंदर आते समय इस बात का खास ख्याल रखना पड़ता है कि किसी कब्र पर उनके पैर न पड़ जाएं। हालांकि इस कब्रिस्तान के बराबर में ही एक बड़ी मस्जिद है जिसमें काफी जगह खाली भी है, लेकिन इन बच्चों का प्रवेश वहां प्रतिबंधित है। 
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बच्चों के लिए यहां विशेष तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि उनके प्रवेश से मस्जिद प्रदूषित भी हो सकती है। यहां तक की मदरसे में पढ़ते समय ये बच्चे तेज आवाज में पढ़ाई भी नहीं कर सकते क्योंकि इससे मस्जिद के प्रबंधक नाराज भी हो सकते हैं। 
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सरकार की ओर से भी नहीं मिल रही कोई मदद

मस्जिद के कुछ प्रबंधकों को तो बच्चों के कब्रिस्तान में पढ़ने पर भी आपत्ति है उन्हें लगता है कि बच्चों की उपस्थिति से कब्रों को परेशानी हो सकती है।

स्‍थानीय निवासियों के अनुसार सरकार ने कुछ समय पहले मदरसे को दूसरी जगह स्‍थानांतरित करने का सुझाव दिया था। लेकिन उस जगह के काफी दूर होने और बच्चों के मदरसों को छोड़ने के कारण वह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 

अब ये आलम है कि अब हर गुजरते समय के साथ कब्रिस्तान में कब्रें बढ़ती जा रही हैं और बच्चों के पढ़ने के लिए जगह घटती जा रही है। शिक्षकों के अनुसार अब इतनी जगह भी नहीं बची है कि वे आराम से निकल सकें। 

अगर किसी दिन कोई शव दफनाया जाता है तो उस दिन कक्षाओं की छुट्टी करनी पड़ती है। पूर्व में मदरसे में बच्चों की संख्या 60 के करीब थी जो फिलहाल घटकर 30 रह गई है। बताया जाता है कि इस मदरसे को सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी जाती है। इसका स्वामित्व भी मदरसा बोर्ड के पास है और यह राजस्‍थान वक्फ बोर्ड के अधीन काम करता है, लेकिन इसके सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किया जाता।
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