Rajasthan- Govind Singh Dotasra and Ashok Gehlot
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साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने अपनी टीम बना ली है। लेकिन राजस्थान में अब तक कांग्रेस संगठन का विस्तार अटका हुआ है। 26 जनवरी से प्रदेश में पार्टी हाथ से हाथ जोड़ो अभियान शुरू करने जा रही है। पार्टी इस अभियान के लिए पुराने नेताओं और बिना संगठन के सहारे मैदान में उतरने जा रही है। गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाले पांच महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस की टीम अब तक नहीं बन सकी है। जबकि पार्टी के ही उदयपुर में हुए चिंतन शिविर में यह निर्णय लिया था कि प्रदेशों में 90 से 180 दिन के भीतर तमाम संगठनात्मक नियुक्ति हो जाएंगी। मगर तब से अब तक 250 दिन से ज्यादा हो गए और कांग्रेस में नियुक्तियां आधी भी नहीं हो सकी हैं
विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने इस महीने की कुछ ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की। इसके बाद माना गया कि अब पार्टी जल्द ही तमाम संगठनात्मक नियुक्ति भी कर देगी। लेकिन मामला फिर अटक गया। पार्टी को प्रदेश में 30 से ज्यादा नए जिलाध्यक्ष भी नियुक्त करना है। लेकिन अब तक इसकी भी कोई सूची जारी नहीं हुई है। कुछ जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश में निर्वतमान कार्यकारिणी ही काम कर रही है। जयपुर और कोटा में तो कांग्रेस को तीन-तीन जिलाध्यक्ष लगाने हैं। मगर अब तक एक भी नहीं लग सका है।
राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अमर उजाला से चर्चा में कहा, प्रदेश कांग्रेस संगठन का विस्तार भी गुटबाजी के चलते अटका हुआ है। हाथ से हाथ जोड़ो अभियान और विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन की यह नियुक्तियां बेहद अहम हैं। 26 जनवरी से पार्टी का अभियान शुरू होने जा रहा है। इस अभियान में पार्टी बिना संगठन के ही मैदान में उतरने जा रही है। अजय माकन के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा को नए प्रभारी नियुक्ति के बाद यह माना जा रहा था कि प्रदेश में पार्टी की स्थितियां बदलेंगी। लेकिन डेढ़ महीने के बाद भी संगठनात्मक नियुक्तियां तक पूरी नहीं हो पाई हैं। इस बीच राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा भी राजस्थान से गुजर चुकी है।
पुरानी की टीम के भरोसे ही हाथ से हाथ जोड़ो अभियान
26 जनवरी से हाथ से हाथ जोड़ो अभियान शुरू होने जा रहा है। कांग्रेस इसे भारत जोड़ो यात्रा के एक्सटेंशन के रूप में देख रही है। कांग्रेस ने इसके लिए प्रभारी और पर्यवेक्षक भी बनाए हैं। मगर जिलों में इस अभियान के लिए कांग्रेस अपने निवर्तमान पदाधिकारियों के भरोसे ही रहेगी। जिलाध्यक्ष तो ज्यादातर जहां पुराने ही हैं, वहीं पूरी कार्यकारिणी भी पुरानी है। जबकि कई ब्लॉक में तो ब्लॉक अध्यक्ष भी निवर्तमान ही होंगे। हालांकि यह अभियान 2 महीने चलेगा, ऐसे में इस बीच नियुक्तियां होने की संभावना है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राजस्थान में फिलहाल पूरी मशीनरी बजट की तैयारियों में जुटी है। ये सरकार का आखिरी और चुनावी बजट है। उम्मीद है कि आठ फरवरी के आसपास बजट पेश किया जाएगा। गहलोत सरकार बजट को यादगार बनाने की पूरी तैयारियों के साथ लगी हुई है। दूसरी तरफ जिलाध्यक्षों और बाकी बचे ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में खींचतान की संभावना भी है। ऐसे में बजट के आसपास या उसके बाद तक ये नियुक्तियां टल सकती हैं।