राजस्थान भाजपा में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरह जहां राज्य की पूर्व सीएम और भाजपा की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे सिंधिया ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, तो वहीं प्रदेशाध्यक्ष पूनिया भी राजे के खिलाफ बयानबाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस बीच गृहमंत्री शाह ने दोनों नेताओं के बीच चल रहे शीतयुद्ध का पटाक्षेप करने की कोशिश की है और गुजरात मॉडल अपनाकर राज्य में चुनाव जीतने का मंत्र दिया।
एक विश्वस्त सूत्र ने अमर उजाला से चर्चा में बताया कि भाजपा अध्यक्ष सतीश पुनिया कई बार हाईकमान से वसुंधरा राजे की शिकायत कर चुके हैं। राजे लगातार राज्य के पार्टी नेतृत्व की सलाह को दरकिनार करते हुए काम कर रही हैं। वहीं जो दायित्व उन्हें प्रदेश भाजपा की तरफ से दिए जाते है, वे उनकी भी लगातार अनदेखी कर रही हैं। पूर्व सीएम राजे ने 2018 के बाद से हुए उपचुनावों में भाजपा के लिए प्रचार तक नहीं किया है, जिसमें हाल ही में हुए दो सीटों के उपचुनाव भी शामिल हैं। इन चुनावों में प्रचार में भाग नहीं लेने के पीछे उन्होंने अपनी बहू का खराब स्वास्थ्य का कारण बताया था।
प्रदेश की राजनीति में नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे अपने समर्थकों की दो टीमें भी तैयार कर चुकी हैं, जो लंबे समय से राज्य के सभी 33 जिलों और 200 विधानसभा सीटों पर कार्य कर रही है। इनमें एक टीम वसुंधरा और दूसरी वसुंधरा समर्थक मंच है। यह दोनों टीमें सभी क्षेत्रों में वसुंधरा राजे के प्रचार और उनके लिए अभी से चुनाव कार्यों में जुट गई है। इन टीमों में महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा समेत सभी स्तर पर मोर्चा बनाए जा चुके हैं। इन टीमों के गठन और कार्यों से भाजपा में मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल कई नेताओं को खासी आपत्ति भी है कि भाजपा संगठन के साथ ही कैसे वसुंधरा राजे समर्थन में अलग से संगठन काम कर रहे हैं।
शाह ने पूनिया और राजे दोनों की प्रशंसा
शाह ने बैठक में राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के कार्यों और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सरकार की समय शुरू की गईं योजनाओं की जमकर तारीफ की थी। पार्टी के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि शाह की दोनों नेताओं की तारीफ करने से स्पष्ट संदेश जाता है कि वे राज्य के पार्टी नेताओं के बीच मतभेदों को खत्म करने पर जोर दे रहे हैं। उनका सीधा संदेश है कि सभी नेता एकजुट होकर विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट जाएं। शाह अच्छी तरह से जानते हैं कि पूनिया संगठन को चलाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन वसुंधरा का जनता के बीच अपना एक मजबूत जनाधार है और राज्य में जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी का एक साथ होना आवश्यक है।