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राजस्थान बढ़ रहा भयानक भूजल संकट की ओर, कभी भी खत्म हो सकता है पानी

Sun, 28 Jul 2019 02:19 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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जलसंकट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
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देश की एकमात्र मरूभूमि राजस्थान भूजल संकट के कगार पर है। राज्य में भूजल के 295 ब्लॉक में से 184 अति गंभीर श्रेणी में आ चुके हैं। मतलब आधे से ज्यादा राज्य में जमीनी पानी कभी भी समाप्त हो सकता है। राज्य के कई विधायकों एवं पेयजल कार्यकर्ताओं ने इस पर चिंता जताते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई है।

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राज्य सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 33 जिलों को भूजल के हिसाब से कुल 295 ब्लॉक में बांटा गया है जिनमें से 184 ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में आ गए हैं। अतिदोहित यानी ऐसा इलाका जहां रिचार्ज के उपाय नहीं किए जाने पर भूजल कभी भी समाप्त हो सकता है। राज्य सरकार खुद हालात से चिंतित है।

भूजल मंत्री बुलाकी दास कल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में भू-जल की स्थिति अत्यन्त गंभीर है। कुल 295 ब्लॉक में से केवल 45 ब्लॉक सुरक्षित है जबकि 184 ब्लॉक अतिदोहित है। विधानसभा में सिंचाई व भूजल विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कई विधायकों ने राज्य में भूजल स्तर की स्थिति पर चिंता जताई। 
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जैसलमेर से विधायक रूपाराम ने कहा कि भूजल की स्थिति बहुत ही दयनीय है। राजस्थान का क्षेत्रफल भारतवर्ष का 10.45 प्रतिशत है जबकि भूजल की उपलब्धता केवल 1.75 प्रतिशत है। रूपाराम ने कहा कि राज्य के 295 ब्लॉक में से आज की तारीख में केवल 45 ब्लॉक ही सुरक्षित हैं जबकि ऐसे 34 ब्लॉक संकटमय और 28 ब्लाक अर्ध संकटमय श्रेणी में हैं। 

अतिदोहित यानी ऐसे ब्लॉक जहां आगे चलकर भूजल खत्म हो जाएगा की संख्या 183 है। ऐसे ब्लॉक को डार्कजोन भी कहा जाता है क्योंकि यहां जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है उतना रिचार्ज नहीं हो रहा। एक रिपोर्ट के अनुसार 2013 में ऐसे ब्लॉक की संख्या 164 थी।

गंगापुर से विधायक रामकेश मीणा ने भी सदन में भूजल की खराब स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में दोहन योग्य भूजल की मात्रा केवल 1.72 प्रतिशत है। राजस्थान में हमेशा न्यूनतम वर्षा होती है और राजस्थान प्रदेश भयंकर जल संकट की ओर जा रहा है।

जानकारों के अनुसार चिंता की बात यह है कि पानी का दोहन जिस अंधाधुंध तरीके से हो रहा है रिचार्ज उस स्तर पर नहीं हो रहा। यही कारण है कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राज्य के जोधपुर जैसे जिले में तो पानी 165 मीटर से भी अधिक नीचे चला गया है।

भूजल मंत्री कल्ला के अनुसार राजस्थान में दो-तिहाई हिस्सा मरूस्थल होने और औसत वर्षा अत्यधिक कम होने के कारण जल की एक एक बूंद बचाना और बचे हुए पानी का मितव्ययता से उपयोग किया जाना अत्यन्त आवश्यक है।

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