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विधानसभा चुनाव: नेताओं के झगड़े में फंसी कांग्रेस की राजस्थान सूची

Thu, 15 Nov 2018 09:28 PM IST
विनोद अग्निहोत्री, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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राजस्थान में कांग्रेस की जीत की संभावनाओं के चलते कांग्रेस को एक एक सीट पर उम्मीदवार चुनने में नेताओं के बीच जबर्दस्त खींचतान का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस महासचिव और पार्टी में इन दिनों बेहद ताकतवर माने जाने वाले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच रस्साकसी तो जगजाहिर है, लेकिन कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) के भीतर कई वरिष्ठ सदस्य भी स्क्रीनिंग कमेटी (छानबीन समिति) की कार्यप्रणाली से बेहद नाराज दिखे।

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सूत्रों के मुताबिक इसे लेकर वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी और अशोक गहलोत के बीच थोड़ी नोंक झोंक भी हुई। अंबिका को इस बात पर एतराज है कि अधिसंख्य सीटों पर स्क्रीनिंग समिति ने सिर्फ एक ही नाम की सिफारिश क्यों की, जबकि प्रदेश कांग्रेस ने हर सीट पर एक से ज्यादा नाम भेजे थे। कई सीटों पर अकेले वह नाम आ गया जिसे प्रदेश कांग्रेस ने अपने पैनल में भेजा ही नहीं था, और उसके पैनल के नाम गायब थे। किसके कहने पर स्क्रीनिंग कमेटी ने नाम बदले, यह सवाल भी बैठक में उठा।

सूत्रों के मुताबिक बुधवार को हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में जब राजस्थान में टिकट बंटवारे पर बातचीत शुरू हुई तो ज्यादातर सीटों पर स्क्रीनिंग समिति की तरफ से एक ही नाम आने पर अंबिका सोनी ने सख्त एतराज जताया। उन्होंने कहा कि अगर स्क्रीनिंग कमेटी ही एक नाम तय कर लेगी तब केंद्रीय चुनाव समिति क्या सिर्फ उस पर मोहर लगाने के लिए बैठी है। उन्होंने स्क्रीनिंग समिति की अध्यक्ष कुमारी शैलजा को भी इसके लिए आड़े हाथों लिया। 
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सूत्रों का कहना है कि शैलजा ने यह अशोक गहलौत के दबाव में किया । सोनी एवं कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं को इस बात पर भी एतराज था कि कई सीटों पर न सिर्फ एक ही नाम है बल्कि साठ पैंसठ और 70 साल की उम्र वाले एसे नाम हैं जो 2008 और 2013 में भी चुनाव हार चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि बैठक में मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा कि 2008 में जब राज्य में कांग्रेस की लहर थी तब भी जो लोग चुनाव हार गए, उनके नाम क्यों भेजे गए हैं। 

इस पर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने सफाई दी कि प्रदेश कांग्रेस की ओर से जो नाम तय किए गए, स्क्रीनिंग कमेटी ने उन्हें बदल दिया। इसके बाद विवाद बढ़ता देख बैठक स्थगित कर दी गई और पार्टी की पहली सूची भी जारी नहीं हो सकी। इसके बाद गुरुवार को फिर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई। जिसमें वह सारे नाम भी शामिल किए गए जो प्रदेश कांग्रेस की चुनाव समिति ने तय किए थे।

 हालांकि अशोक गहलोत के करीबी लोगों का कहना है कि राजस्थान के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी गहलोत को ही है और उनकी सूची में एक भी ऐसा नाम नहीं हो सकता जो दो बार चुनाव हारा हो। वैसे भी गहलोत का पूरा जोर राजस्थान में कांग्रेस को जिताने का है, नकि टिकटों के लिए मारामारी करना। 

यह गहलोत विरोधियों का दुष्प्रचार है। सूची में देरी की असली वजह यह है कि राज्य में भाजपा के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में आंधी है, इसलिए इस बार हर सीट पर दावेदारों की तादात खासी है। इसलिए साफ छवि वाले जिताऊ उम्मीदवारों के चयन में मशक्कत होना स्वाभाविक है। वैसे भी पार्टी फूंक फूंक कर कदम रख रही है।

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