राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 का मुकाबला इस बार बहुत ज्यादा उलझा हुआ नजर नहीं आ रहा है। तमाम सर्वे बता रहे हैं कि राजस्थान में इस बार कांग्रेस की वापसी हो सकती है। वहीं, भाजपा के लिए सत्ता बचाए रखने का काम चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। वैसे भी राजस्थान की परंपरा रही है कि यहां की जनता हर पांच साल में सरकार बदल देती है। इसके बावजूद मुस्लिम मतदाताओं का रुख कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।
हमेशा की तरह इस बार भी मुस्लिम मतदाता नतीजों में अहम भूमिका निभाएंगे। पिछले चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के रुख से कांग्रेस को खासा नुक्सान उठाना पड़ा था। मुस्लिमों के रुख ने कांग्रेस को भी चिंता में डाल रखा है। कई मुस्लिम कार्यकर्ताओं का कहना था कि 2013 में कांग्रेस ने यहां कमजोर उम्मीदवार उतारे।
2013 विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट से महज दो मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीत पाए थे। कांग्रेस ने 16 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जिनमें कुछ मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे, लेकिन किसी को भी जीत नसीब नहीं हुई।
राजस्थान में मुस्लिमों की आबादी 11.41 फीसदी है। विधानसभा की 14 सीटों पर मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका अदा करते हैं। 2013 में ऐसी ही कुछ सीटों पर जीत का अंतर सभी निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवारों को मिले वोटों से कम था।
राजस्थान मुस्लिम फोरम ने कांग्रेस सहित सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एक मंच पर आने की अपील की है। फोरम की अपील है कि ऐसे राजनीतिक दल आबादी के अनुपात में मुस्लिमों को टिकट दें। किसी भी दल को मुस्लिमों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर मुस्लिमों को उचित सम्मान नहीं मिला तो वो विकल्प ढूंढ़ लेंगे।