राजस्थान में मतदान की तारीख नजदीक आते ही प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। चुनावी समर में मतदाताओं की नब्ज परखने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने कई डॉक्टर उम्मीदवार उतारे हैं। इन उम्मीदवारों में कार्डियक सर्जन, रेडियोथेरेपी विशेषज्ञ, फिजिशियन, प्रोफेसर और डॉक्टरेट डिग्रीधारी शामिल हैं।
पार्टियों का मानना है कि डॉक्टरों की सामाजिक छवि अच्छी होती है और चुनाव में उनके जीतने के ज्यादा मौके हैं। पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने ज्यादा डॉक्टर उतारे हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने नौ और भाजपा ने छह डॉक्टर उतारे थे।
18 डॉक्टर चुनावी दंगल में उतरे
विधानसभा चुनाव में 18 डॉक्टर चुनावी ताल ठोक रहे हैं। इनमें से 11 कांग्रेस और सात भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे हैं। भाजपा ने मंत्री और हनुमानगढ़ जिले के खाजूवाला से विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल और मंत्री दिगंबर सिंह के बेटे डॉ. शैलेश सिंह को डीह से उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की सूची में डॉक्टरेट डिग्री धारकों में जायल से डॉ.मंजू बाघमार, विराटनगर से फूल चंद भींडा और सिविल लाइंस जयपुर से लड़ रहे डॉ. अरुण चतुर्वेदी का नाम शामिल है।
वहीं कांग्रेस ने एसएमएस अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आर सी यादव को बहरोड़ से प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने 2013 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। अलवर से मौजूदा सांसद डॉ.करण सिंह यादव को मुंडावर सीट से टिकट दिया गया है। इसी तरह खेतड़ी से डॉ. जितेंद्र सिंह, धौलपुर से डॉ. शिव चरण का नाम है। इसके साथ ही कुछ डॉक्टरेट डिग्रीधारक भी इस बार चुनाव मैदान में हैं।