79 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 79,450 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। यह निवेश राजस्थान में अब तक हुए सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल है। इस परियोजना का संचालन एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 74 प्रतिशत तथा राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
9 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली विशाल रिफाइनरी
रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि यह संयंत्र हर वर्ष लगभग 90 लाख टन कच्चे तेल को प्रोसेस करेगा। यदि इसे दैनिक क्षमता में समझें तो यहां करीब 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल की प्रतिदिन प्रोसेसिंग की जा सकेगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली यह रिफाइनरी राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों की पेट्रोलियम आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, कई औद्योगिक उत्पाद भी बनेंगे
इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत इसका पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। यहां केवल पेट्रोल, डीजल और केरोसिन जैसे ईंधन ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि कई उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पाद भी तैयार होंगे, जिनमें प्रमुख रूप से-
- पॉलीप्रोपाइलीन (Polypropylene)
- पॉलीएथिलीन (Polyethylene)
- बेंजीन (Benzene)
- बेटाडीन (Betadiene) जैसे उत्पाद शामिल हैं।
राजस्थान के ऊर्जा मानचित्र में ऐतिहासिक बदलाव
जो पचपदरा क्षेत्र कभी मरुस्थलीय वीरानी और नमक उत्पादन के लिए जाना जाता था, वही अब देश के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में शामिल होने जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में राजस्थान की औद्योगिक तस्वीर बदल सकती है। इससे न केवल राज्य की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचे और निर्यात के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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प्रधानमंत्री करेंगे राष्ट्र को समर्पित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पचपदरा पहुंचकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहेंगे। विशेषज्ञों की मानें तो पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि राजस्थान के भविष्य की नई नींव है। अत्याधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ईंधन उत्पादन, पेट्रोकेमिकल निर्माण, विशाल निवेश और रोजगार की अपार संभावनाओं के साथ यह परियोजना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।