शादी-विवाह में पंडित, हलवाई और टेंट हाउस वालों की अहम जिम्मेदारी होती है, हालांकि राजस्थान सरकार ने उन्हें एक और बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
इस जिम्मेदारी के साथ ही इनका काम बढ़ने के साथ ही सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
दरअसल अब ये लोग बाल विवाह पर रोक लगाने में सरकार के साथ सहयोग करेंगे। यानि कि पंडित, हलवाई और टेंट हाऊस वाले बाल विवाह पर रोक लगाने का काम भी करेंगे। बता दें कि राजस्थान में अक्षय तृतीया व पीपल पूर्णिमा पर बड़ी तादाद में बाल विवाह करवाए जाते हैं।
राजस्थान सरकार का विशेष अभियान
दरअसल बाल विवाह को लेकर राजस्थान सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है।
प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने पीपल पूर्णिमा और अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों पर बाल विवाह रोकने के लिए सभी जिलों के जिला कलेक्टर और पुलिस अधिक्षकों को पत्र भेज कर विशेष दिशा निर्देश दिए हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि बाल विवाह को रोकने के लिए जिला कलेक्टर और पुलिस अधिक्षक पंडित, हलवाई, टेंट हाउस और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाए।
पीपल पूर्णिमा और अक्षय तृतीय पर रहता है खतरा
राज्य सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह ए मुखोपाध्याय द्वारा राज्य के सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधिक्षक को इस बावत पत्र भेज दिया गया है।
जिसमें कहा गया है कि 21 अप्रैल को अक्षय तृतीया और 4 अप्रैल पीपल पूर्णिमा पर राज्य में बाल विवाह को रोकने के लिए विशेष अभियान के तहत पंडित, हलवाई और टेंट हाउस कैटर्स से सहयोग लिया जाए।
वहीं बाल विवाह को लेकर ऐसे संवेदनशील गांवो को भी चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को बाल विवाह एक्ट 2006 को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए भी कहा गया है।
वहीं राज्य गृह विभाग की ओर से जारी सर्कुलर में जिला प्रशासन से जिलों और गांवो में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए महिला समूह का सहयोग लेने के लिए भी कहा गया है।
बाल विवाह के लिए कंट्रोल रूम
सरकार ने बाल विवाह को रोकने के लिए जिलों में और ब्लाक मुख्यालयों में बकायदा कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए हैं। जिसकी जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को दी गई है साथ ही जिलों के अलग-अलग हिस्सों में बाल विवाह को रोकने के लिए सरकारी कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान टेंट डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जिंदल का कहना है कि एसोसिएशन बर्थ सर्टिफिकेट के बाद ही शादी की बुकिंग करेंगे। इस बारे में राज्य के करीब 40 हजार एसोसिएशन मेंबर को सर्कुलर जारी कर दिया गया है।
उनका कहना है कि बाल विवाह को कोई भी मामला पता चलने पर सीधे पुलिस को सूचना दी जाऐगी।