जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 में उपन्यास ‘द प्रोफेट सॉन्ग’ के बुकर पुरस्कार विजेता और आयरिश लेखक पॉल लिंच भी शामिल हुए। उन्होंने इस महोत्सव से जुड़े कुछ पल भी साझा किए। महोत्सव का मीडिया पार्टनर अमर उजाला भी है। लिंच ने बताया कि उनका यह उपन्यास मानवीय संभावना को दर्शाता हैं, जो आज की दुनिया में करीब-करीब सच्चाई बन चुकी हैं। व्यक्ति जीवन के भयानक बदलावों की आहट को सुन नहीं पाता। उपन्यास का मुख्य चरित्र इलिस, उसका पति और दो बच्चे हैं। इलिस के पति के स्वतंत्रता संबंधी विचार उसे राज्य सरकार का दुश्मन बना देते हैं और वह जेल चला जाता है। पत्नी और बच्चे बेघर हो जाते हैं। देश एक गृहयुद्ध के दौर से गुजर रहा है, जिसके बाद ढेरों परिवारों को देश से भागने पर मजबूर होना पड़ता है।
पॉल स्वयं को राजनीतिक लेखक नहीं मानते। उनके अनुसार मनुष्य और उसकी त्रासदी उनका विषय है, राजनीति नहीं। उन्होंने कहा कि उपन्यास में मुख्य चरित्र इलिस का संघर्ष, उसका दर्द और शरणार्थी बनकर बेघर होना बताता है कि यह समस्या दुनिया के कई देशों में हो रही है। पॉल ने कहा कि वह ध्यान के माध्यम से अपनी रचना प्रक्रिया को समझते हैं और समझाते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अंततः समाज का ही अंश हैं और उसके साथ घटती त्रासदी, जीवन का ही प्रतिरूप हैं। मशहूर लेखक अमीश त्रिपाठी और उनकी बहन भावना रॉय भी इस महोत्सव का हिस्सा बने। इस दौरान उन्होंने कहा कि भक्ति पर लिखी गई उनकी सबसे अधिक बिकने वाली किताब में मूर्ति पूजा की शक्ति, ईष्ट देवता और भक्ति के सार शामिल हैं। इसमें सरल व्याख्याओं के माध्यम से मूर्ति पूजा और हमारे भीतर और बाहर की दिव्यता के बारे में बताया गया है।