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Nagaur: 12 वर्षीय भार्गवी सिंह ने ताइक्वांडो में रचा इतिहास, 27 गोल्ड मैडल जीतकर बनी थांवला की गोल्डन गर्ल

Wed, 28 May 2025 03:36 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

नागौर के थांवला गांव की रहने वाली आठवीं की छात्रा ने ताइक्वांडो चैंपियंस कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मैडल जीता। अब तक 27 गोल्ड मैडल हासिल कर चुकी भार्गवी को ग्रामीणों ने थांवला की गोल्डन गर्ल की उपाधि दी है।
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नीली ड्रेस में भार्गवी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले के रियाबड़ी उपखंड के थांवला गांव की 12 वर्षीय बेटी भार्गवी सिंह ने एक बार फिर ताइक्वांडो चैंपियंस कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मैडल जीतकर जिले, गांव और राज्य का नाम रोशन कर दिया है। भार्गवी अब तक कुल 27 गोल्ड मैडल अपने नाम कर चुकी हैं। इसके साथ ही वह दो बार स्टेट चैंपियन बनने का गौरव भी प्राप्त कर चुकी हैं और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस उपलब्धि पर ग्रामीणों ने उन्हें थांवला की गोल्डन गर्ल की उपाधि दी है।

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भार्गवी के पिता दीपक सिंह  एक निजी प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं और मां गृहिणी हैं। कक्षा आठ की छात्रा भार्गवी बचपन से ही खेलों के प्रति गहरी रुचि रखती हैं। मात्र 4.5 साल की उम्र में ब्लैक बेल्ट प्राप्त कर वे राजस्थान की सबसे कम उम्र की ब्लैक बेल्ट विजेता बन गईं, जिसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है। इसके बाद उन्होंने ताइक्वांडो को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत कर इस खेल में महारथ हासिल की।

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उनकी इस सफलता में कोच सोहेल खान का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने उन्हें प्रशिक्षण देकर विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया। जयपुर के बैटल्स इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित ताइक्वांडो चैंपियंस कप में भार्गवी ने दमदार प्रदर्शन कर गोल्ड मैडल अपने नाम किया। इससे पहले उन्होंने 2023 में अलवर में आयोजित ताइक्वांडो फेडरेशन की स्टेट चैंपियनशिप में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीता था और 2024 में 68वीं स्कूल गेम्स स्टेट चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।

हाल ही में उन्होंने मध्यप्रदेश के विदिशा में आयोजित राष्ट्रीय विद्यालय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भी भाग लिया, जहां उन्हें अंडर-14 श्रेणी की अनुपलब्धता के कारण अंडर-17 वर्ग में मुकाबला करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने देशभर से आए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि राजस्थान में अंडर-14 आयु वर्ग को ताइक्वांडो में शामिल किया जाना चाहिए ताकि छोटे खिलाड़ियों को अपनी आयु के अनुसार सही मंच मिल सके।

भार्गवी ने कहा कि ताइक्वांडो केवल एक खेल नहीं बल्कि उनकी पहचान और जुनून है। वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने का सपना देखती हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और सभी शुभचिंतकों को दिया है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया और मनोबल बढ़ाया। भार्गवी वर्तमान में थांवला के एक निजी विद्यालय में अध्ययन कर रही हैं और पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
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उनकी इस उपलब्धि ने केवल उनके परिवार और कोच को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे नागौर जिले और राजस्थान के लिए यह एक गर्व की बात है। अगर भार्गवी इसी तरह मेहनत करती रहीं तो वह जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी।

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