राजस्थान में कांग्रेस के आला नेताओं में आपसी दूरियां नजर आ रही हैं, जिससे कांग्रेस बंटी हुई दिखाई दे रही है।
माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच दूरियों के चलते कई आला नेता लोकसभा चुनाव को लेकर चल रही पार्टी की राजनीति में हिस्सा नहीं रहे हैं।
वे पार्टी के प्रचार करने के बजाय शांत बैठे हुए हैं। इसमें पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान, पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, बीना काक सहित कई वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं।
गहलोत को भी गुजरात का जिम्मा दिया है, जो ऐसे नेताओं को एकजुट करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते थे।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद पार्टी में एकजुटता की कमी दिखाई दे रही है, जिसका फायदा भाजपा को होता दिख रहा है।
सूत्रों ने बताया कि आलाकमान की ओर से सचिन पायलट को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के बाद युवाओं को खासी तवज्जो दी जा रही है।
ऐसे में पायलट ने भी पूर्व मुख्यमंत्री से सियासी दूरियां बना रखी हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार में गहलोत के करीबियों में से एक को भी फिलहाल नए प्रदेशाध्यक्ष ने लोकसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। ऐसे में इन्होंने कांग्रेस की राजनीति से दूरी बना ली है।
दो सीटों पर ही दिख रहे हैं चेहरे
अजमेर और जयपुर ग्रामीण दो सीटें ही ऐसी हैं, जहां कांग्रेस संगठित दिखाई दे रही है। प्रदेश कांग्रेस में ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले दिग्गज सचिन पायलट व सी पी जोशी यहां से खड़े हुए हैं।
इस कारण विधानसभा चुनाव के दौरान रूठे कांग्रेसी भी इनके साथ प्रचार करके अपने नंबर बढ़ा रहे हैं, लेकिन बाकी सभी सीटों पर कांग्रेस बिखरी हुई दिखाई दे रही हैं।