राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने खिलाड़ियों को आदेश दिया है कि उन्हें राज्य सरकार से पुरस्कार प्राप्त करने के लिए ये हलफनामा देना होगा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या जमात-ए-इस्लामी के सदस्य नहीं हैं।
राज्य सरकार के इस आदेश के बाद हंगामा मच गया है। भाजपा से जुड़े कई संगठनों ने इसका विरोध किया है। वहीं, राज्य की कांग्रेस सरकार ने कहा है कि यह नियम 1986 से लागू है।
विशाल सिंह को दिया पुरस्कार
राज्य सरकार के आदेश का खुलासा शुक्रवार को आयोजित एक पुरस्कार समारोह के बाद हुआ।
क्रीड़ा परिषद में आयोजित कार्यक्रम में वेटलिफ्टर विशाल सिंह सहित कई खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया।
पुरस्कार के तहत उन्हें दो लाख रुपए की राशि दी गई।
एक टीवी चैनल के मुताबिक, विशाल सिंह ने बताया कि उन्हें यह पुरस्कार लेने से पहले यह हलफनामा देना पड़ा कि वे संघ से जुड़े नहीं हैं।
अभाविप व भाजयुमो ने किया हंगामा
ये खबर फैलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ता हलफनामे के विरोध में सवाई मान सिंह स्टेडियम पहुंच गए और वहां तोड़फोड़ की।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजयुमो के साथ-साथ क्रीड़ा भारती, राजस्थान समेत कुछ अन्य संगठनों ने भी इस पर विरोध जताया है।
नियम है 1986 से
इस संबंध में क्रीड़ा परिषद का कहना है कि यह नियम वर्ष 1986 से ही लागू है, इसलिए उन्होंने खेल विभाग के आदेशों का ही पालन किया है।
उल्लेखनीय है कि इस नियम के लागू होने के बाद से राजस्थान में भाजपा भी दो बार सरकार में रही है।
हालांकि, भाजपा सरकर में खेल मंत्री रहे युनुस खान का कहना है कि अपने कार्यकाल में उन्होंने यह नियम वापस ले लिया था।