मिग-27 विमान को 1984 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, जबकि इससे कहीं पहले 1960 में मिग-21 को वायुसेना का हिस्सा बनाया गया था। मिग-21 की 6 स्क्वाड्रन अब भी पाकिस्तान सीमा पर इंटरसेप्टर के तौर पर सेवा में हैं, लेकिन मिग-27 को महज 35 साल में ही इसके कलपुर्जों की कमी के कारण रिटायर करना पड़ रहा है।
वायुसेना सूत्रों के मुताबिक, इस विमान का निर्माण करने वाली रूसी कंपनी अब कलपुर्जे पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इसके चलते विमान में दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं। इसी साल दो मिग-27 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।