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राजस्थान: पंचायत चुनाव से पहले फर्जी OBC सर्टिफिकेट का आरोप, महिला सरपंच प्रत्याशी पर उठे सवाल; शुरू हुई जांच

Thu, 08 Oct 2026 08:25 AM IST
कोटपुतली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली

सार

कोटपूतली की पवाना अहीर ग्राम पंचायत में महिला सरपंच प्रत्याशी के कथित फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्याशी का पीहर हरियाणा में होने के बावजूद कोटपूतली से ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाया गया और उसे वास्तविक दिखाने के लिए एसडीएम के हस्ताक्षर भी कथित तौर पर स्कैन या संपादित किए गए।
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फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र मामले में एसडीएम को ज्ञापन सौंपते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों के बीच पवाना अहीर ग्राम पंचायत में महिला सरपंच प्रत्याशी से जुड़ा कथित फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्याशी का मायका हरियाणा में होने के बावजूद कोटपूतली में कथित रूप से गलत तरीके से ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाया गया। इतना ही नहीं, प्रमाण पत्र को असली दिखाने के लिए उपखंड अधिकारी के हस्ताक्षर भी कथित तौर पर स्कैन या संपादित कर लगाए गए। मामले को लेकर बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास के नेतृत्व में ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल उपखंड कार्यालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम योगेश सिंह देवल को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

ई-मित्र संचालक पर मिलीभगत का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, महिला प्रत्याशी का पीहर हरियाणा में है। आरोप है कि कोटपूतली के एक ई-मित्र संचालक ने कथित मिलीभगत से दस्तावेजों में बदलाव कर महिला के नाम से ओबीसी प्रमाण पत्र तैयार किया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि प्रमाण पत्र पर एसडीएम के हस्ताक्षर भी कथित तौर पर स्कैन या संपादित करके लगाए गए। उनका दावा है कि यह पूरा काम चुनाव में पात्रता हासिल करने के उद्देश्य से किया गया।

एसडीएम बोले- जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

ग्रामीणों के ज्ञापन को एसडीएम योगेश सिंह देवल ने गंभीरता से लेते हुए प्रमाण पत्र की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्र के साथ-साथ उस पर किए गए हस्ताक्षर की भी जांच की जा रही है। एसडीएम ने कहा कि यदि जांच में प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से तैयार करने या हस्ताक्षर से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद खुलेगा पूरा राज

मामला सामने आने के बाद अब प्रशासनिक जांच के नतीजे का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रमाण पत्र किस स्तर पर तैयार किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। वहीं, ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। अब प्रशासन की जांच से ही यह साफ होगा कि ओबीसी प्रमाण पत्र में वास्तव में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं।

 

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