फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

NEET UG 2026 Result: कोटा का फिर बजा डंका! AIR-1 समेत टॉप-10 में 4 और टॉप-100 में दर्जनों छात्रों का जलवा

Fri, 17 Jul 2026 01:25 PM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा

सार

Neet UG Result: एनटीए ने नीट-यूजी 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। परिणामों में कोटा के कोचिंग संस्थानों का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला। आर्यन गुप्ता ने ऑल इंडिया रैंक-1, पंशुल बंसल ने AIR-2, आयुष भालोटिया ने AIR-4 और गौरव सिंह ने AIR-9 हासिल की।
विज्ञापन
NEET UG 2026 - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 का रिजल्ट एनटीए ने गुरुवार देर रात घोषित कर दिया। परिणामों में एक बार फिर कोटा के कोचिंग संस्थानों का दबदबा देखने को मिला। यहां टॉप-10 में चार छात्रों ने जगह बनाई है।
विज्ञापन


आर्यन बने AIR-1, पंशुल को मिली AIR-2
देर रात जारी परिणामों के अनुसार आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल दोनों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए। हालांकि, टाई-ब्रेकर नियम के आधार पर आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) और पंशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 (AIR-2) घोषित किया गया। वहीं आयुष भालोटिया ने 710 अंक के साथ AIR-4 और गौरव सिंह ने AIR-9 हासिल की। एनटीए ने 690 या उससे अधिक अंक पाने वाले टॉप-138 अभ्यर्थियों की सूची भी जारी की है।

7वीं कक्षा में तय कर लिया था डॉक्टर बनने का सपना
हरियाणा के फरीदाबाद निवासी पंशुल बंसल ने बताया कि उनका लक्ष्य शुरू से ही डॉक्टर बनना था। उन्होंने 10वीं और 12वीं दोनों में 94 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके अलावा जेईई मेन 2026 में भी उन्होंने 99.5 पर्सेंटाइल स्कोर किया था।
विज्ञापन


माता-पिता ने कभी नहीं बनाया दबाव
पंशुल के पिता ने नेवल इंजीनियरिंग की है और वर्तमान में बिजनेसमैन हैं, जबकि उनकी मां मोनिका कंपनी सेक्रेटरी हैं। एक करियर इंस्टीट्यूट में दो साल तक रेगुलर क्लासरूम के छात्र रहे पंशुल ने बताया कि उनके माता-पिता ने कभी करियर को लेकर दबाव नहीं बनाया।

यह भी पढ़ें: आज दिल्ली वाले आवास पर गृह प्रवेश करेंगे नीतीश कुमार, कुछ देर में पटना से होंगे रवाना
विज्ञापन


छोटी उम्र में तय किया लक्ष्य, मिली बड़ी सफलता
पंशुल ने कहा कि 10वीं के बाद उनके सामने कई विकल्प थे, यहां तक कि वे आर्ट्स भी चुन सकते थे। लेकिन उन्हें शुरू से ही बायोलॉजी में रुचि थी। उन्होंने 7वीं कक्षा में ही तय कर लिया था कि उन्हें साइंस लेकर डॉक्टर बनना है। उनका मानना है कि कम उम्र में लक्ष्य तय करने से उसी दिशा में सोच विकसित होती है, जिससे फाउंडेशन और कॉन्सेप्ट मजबूत होते हैं और लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें