जिले की चार पंचायत समितियों की 163 में से 162 ग्राम पंचायतों में प्रथम चरण के चुनावी परिणाम घोषित हो गए हैं। रात भर चली मतगणना के बाद रविवार को नतीजे सामने आए। इन नतीजों में कई प्रमुख नेताओं के परिजनों की किस्मत का निर्णय हुआ, जिनमें पूर्व मंत्री के पुत्र ने बड़े अंतर से जीत हासिल की, जबकि निवर्तमान जिला प्रमुख के पुत्र को चुनाव में हार झेलनी पड़ी।
जिले भर में सबसे बड़ी जीत इटावा पंचायत समिति की गेंता ग्राम पंचायत में दर्ज हुई, जहां प्रत्याशी ने 1,361 वोटों के अंतर से विजय हासिल की। वहीं, लाडपुरा पंचायत समिति की मंडाना ग्राम पंचायत में मुकाबला सबसे कड़ा देखने को मिला, जहां जीत और हार का निर्णय मात्र दो वोटों के अंतर से तय हुआ। लाडपुरा पंचायत समिति की गिरधरपुरा ग्राम पंचायत में सरपंच और वार्ड पंच पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।
पूर्व मंत्री के पुत्र की जीत और जिला प्रमुख के बेटे की हार
सांगोद पंचायत समिति की ग्राम पंचायत कुंदनपुर के चुनावी नतीजे पर सभी राजनीतिक हलकों की नजरें बनी हुई थीं। इस पंचायत से पूर्व मंत्री भरत सिंह के पुत्र गंगा सिंह ने सरपंच पद पर शानदार विजय प्राप्त की। गंगा सिंह ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुशीला नागर को 778 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। गंगा सिंह के पक्ष में 1,245 मत आए, जबकि सुशीला नागर को केवल 467 मत ही प्राप्त हो सके।
इसके विपरीत, सांगोद पंचायत समिति की ही तेहरोली ग्राम पंचायत से चुनावी मैदान में उतरे निवर्तमान जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल के पुत्र कपिल मेघवाल चुनाव हार गए। कपिल मेघवाल को चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के साथ मात्र 387 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
मंडाना में दो वोटों से फैसला और मतगणना केंद्र पर हंगामा
लाडपुरा पंचायत समिति की मंडाना ग्राम पंचायत में मतगणना के दौरान भारी विवाद और हंगामा देखने को मिला। मंडाना में परिणाम आने के बाद एक पक्ष ने दोबारा मतों की गणना कराने की मांग रख दी। इस मांग को लेकर रविवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण मतगणना केंद्र के बाहर एकत्र हो गए और उग्र नारेबाजी शुरू कर दी। मौके की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और परिसर की व्यवस्था को नियंत्रित किया।
भारी गहमागहमी के बीच रविवार दोपहर 12 बजे के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने मंडाना ग्राम पंचायत का अंतिम परिणाम घोषित किया। इस बेहद करीबी मुकाबले में दयाराम ने नवल किशोर को दो वोटों के मामूली अंतर से हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। दयाराम को कुल 1,301 वोट हासिल हुए, जबकि नवल किशोर 1,299 वोट ही प्राप्त कर पाए।
इटावा और सुल्तानपुर पंचायत समिति के चुनावी परिणाम
इटावा पंचायत समिति की गेंता ग्राम पंचायत में जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की गई। गेंता से दिग्विजय सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 1,361 मतों से शिकस्त देकर सरपंच का पद अपने नाम किया। इटावा पंचायत समिति की ही ख्यावदा ग्राम पंचायत में ग्यारसी लाल मात्र आठ वोटों के अंतर से जीतकर सरपंच बने।
सुल्तानपुर पंचायत समिति की बड़ोंद ग्राम पंचायत में विजेता प्रत्याशी अंशु सुवालका ने सबसे बड़ी जीत हासिल की। अंशु को कुल 1,592 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहीं सीमा को 684 वोट प्राप्त हुए। इस तरह अंशु ने 908 वोटों के अंतर से विजय हासिल की।
सुल्तानपुर की अमरपुरा ग्राम पंचायत में सबसे करीबी मुकाबला रहा, जहां शबाना ने चंद्रकला को चार वोटों से पछाड़ा। शबाना को 459 मत मिले, जबकि चंद्रकला के खाते में 455 मत आए। सुल्तानपुर की दीगोद ग्राम पंचायत में भाजपा देहात जिला उपाध्यक्ष मनीष शर्मा ने सरपंच पद का चुनाव जीता। नवगठित ग्राम पंचायत बाक्या में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के भाई हरिओम मीणा की पत्नी अनीता मीणा ने सरपंच पद हासिल किया।
सांगोद और लाडपुरा समिति के प्रमुख विजय आंकड़े
सांगोद पंचायत समिति में सबसे बड़ी जीत बपावर ग्राम पंचायत में दर्ज की गई। बपावर में मानसिंह ने 1,237 वोटों के अंतर से सरपंच का चुनाव अपने नाम किया। वहीं सांगोद समिति की सावनभादों ग्राम पंचायत में महेंद्र नागर मात्र सात वोटों से विजयी रहे। लाडपुरा पंचायत समिति की अलरिया जागीर ग्राम पंचायत में प्रसन्न बाई ने 1,069 वोटों से जीत हासिल कर सरपंच पद संभाला। लाडपुरा की ही प्रहलादपुरा ग्राम पंचायत में कांटे की टक्कर रही, जहां गुड्डी बाई महज 13 वोटों से जीतकर सरपंच बनीं।