केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संसद में दिए गए विवादित बयान के खिलाफ बसपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। दोनों दलों ने अलग-अलग पैदल मार्च निकालकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध जताया और राष्ट्रपति के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
दोनों पार्टियों के पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री का बयान डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति अपमानजनक और जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है। इससे बहुजन समाज सहित अन्य वर्गों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है।
बसपा प्रदेश महासचिव हरिसिंह तेमरिया ने कहा कि यह बयान अंबेडकर के विचारों और उनकी विरासत का अपमान है। इससे समाज में गहरी नाराजगी है। वहीं कांग्रेस जिला अध्यक्ष शिवराज मीना ने इसे अमर्यादित और अक्षम्य बताते हुए कहा कि यह डॉ. अंबेडकर के प्रति अनादर को दर्शाता है, जो अस्वीकार्य है।
प्रदर्शनकारियों ने भीमराव अंबेडकर सर्कल से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला और प्रदर्शन कर नारेबाजी के साथ विरोध दर्ज कराया। इसके बाद उन्होंने एडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर गृहमंत्री के बयान पर सख्त कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में राष्ट्रपति से अपील की गई है कि डॉ. अंबेडकर पर की गई टिप्पणी पर संज्ञान लिया जाए।
विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने बताया कि इस बयान से समाज के हर वर्ग में गुस्सा है। सभी ने मांग की है कि ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाए और संविधान के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए कदम उठाए जाएं।