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जोजरी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: तट के 100 मीटर के दायरे में 'नो-कंस्ट्रक्शन'

Mon, 24 Aug 2026 02:31 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी के दोनों ओर 100 मीटर के दायरे में निर्माण और विकास गतिविधियों पर रोक लगा दी है, जबकि 500 मीटर तक खतरनाक उद्योगों पर भी अंतरिम प्रतिबंध लगाया गया है। 
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जोजरी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए सर्वोच्च अदालत ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने तीनों नदियों के बेसिन क्षेत्रों में नदी किनारे से 100 मीटर के दायरे मेंकिसी भी तरह के निर्माण या विकास कार्य पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही  मौजूदा बाढ़ रेखा या नदी प्रवाह क्षेत्र के दोनों तरफ 500 मीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक गतिविधियों और संदूषण पैदा करने वाले उद्योगों के संचालन की अनुमति नहीं होगी। यह सख्त कदम नदी तंत्र को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया  है। 

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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक तरीके से उच्च बाढ़ रेखा तथा आवश्यक पारिस्थितिक बफर जोन के सीमांकन तक यह अंतरिम व्यवस्था प्रभावी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की गई है  अदालत ने नदी तंत्र को बचाने के लिए पूर्व में दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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अंतरिम आदेश और समिति के अधिकार
सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा गठित एकीकृत समन्वय समूह केवल विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने वाली आंतरिक व्यवस्था है। यह व्यवस्था उच्च स्तरीय पारिस्थितिकी निगरानी समिति के अधिकार क्षेत्र में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगी। अदालत ने कहा कि समिति के अध्यक्ष सर्वोच्च अदालत के फैसलों को प्रभावी और तेजी से लागू कराने के लिए अपने स्तर पर आवश्यक निर्देश तथा आदेश जारी करने में पूरी तरह सक्षम होंगे। समिति को पूर्व में दी गई सभी शक्तियां और कार्रवाई के अधिकार पूरी तरह लागू रहेंगे। अदालत ने कहा कि जब तक वैज्ञानिक अध्ययन पूरा नहीं हो जाता, तब तक नदियों के प्रवाह क्षेत्र की सुरक्षा प्राथमिक दायित्व है। इस व्यवस्था से नदी किनारे होने वाले अनधिकृत निर्माण पर विराम लगेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस काम हो सकेगा।

जांच दल की रिपोर्ट और सुधारात्मक कदम
राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट के साथ विशेष जांच दल की विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। जांच दल ने जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्रों में नदी प्रदूषण से संबंधित 16 आपराधिक मामलों की गहन समीक्षा की है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जांच के आधार पर गंभीर धाराएं जोड़कर कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी साक्ष्यों के संकलन के तहत दस्तावेजों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों, सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों और वीडियो क्लिप की बारीक जांच कर रही है। राज्य सरकार ने नदियों के पुनर्जीवन की प्रस्तावित योजनाओं तथा विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सुधारात्मक कार्यों की प्रगति से भी अदालत को अवगत कराया। इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एकीकृत समन्वय समूह गठित करने और प्रदूषण निवारण के लिए 20 सूत्रीय समाधान योजना पर काम करने का सुझाव दिया था।
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औद्योगिक प्रदूषण से मंडराता गंभीर संकट
यह मामला 16 सितंबर को सर्वोच्च अदालत द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान से जुड़ा है। अदालत ने औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली तथा बालोतरा की नदियों के जहरीले होने पर गहरी चिंता जताई थी। जांच में कपड़ा और स्टील री-रोलिंग इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट की प्रमुख भूमिका उजागर हुई है। अदालत ने माना कि पिछले दो दशकों की प्रशासनिक लापरवाही और तंत्र की नाकामी के कारण लगभग 20 लाख लोगों का जीवन, पशुधन और पर्यावरण संकट में पड़ गया है। राजस्थान की प्रमुख मौसमी नदी जोजरी नागौर जिले के पाण्डलू गांव की पहाड़ियों से निकलकर जोधपुर के खेजड़ला खुर्द के पास लूणी नदी में मिलती है। जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली की फैक्ट्रियों का जहरीला पानी बरसों से इसमें बहाया जा रहा है। इससे नदी के किनारे बसे 50 से अधिक गांवों की आबादी सीधे प्रभावित हो रही है।
 

 

 

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