जिले में आज स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में पूर्ण बंद का आयोजन किया गया। स्मार्ट मीटर हटाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर यह बंद व्यापक समर्थन के साथ सफल रहा। इस विरोध प्रदर्शन में छात्र संगठन SFI, व्यापारिक संगठन, बार एसोसिएशन, बस यूनियन, टैक्सी-तांगा यूनियन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। बंद के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं और निजी शिक्षण संस्थानों ने भी अपने दरवाजे बंद रखे।
स्मार्ट मीटर हटाओ संघर्ष समिति ने स्मार्ट मीटर योजना को जनविरोधी और उपभोक्ता विरोधी करार देते हुए तीन सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया है, जिसे मुख्यमंत्री के नाम संबंधित ब्लॉक अधिकारियों को सौंपा जाएगा। समिति का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिलों में कई गुना वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
ये भी पढ़ें: Bikaner: दिल्ली–बीकानेर वंदे भारत ट्रेन को केंद्र की मंजूरी, जल्द शुरू होगी तेज और आधुनिक सुविधा वाली रेलसेवा
इससे इन परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। समिति के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि यह योजना आम जनता के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
बंद के दौरान जिले में शांतिपूर्ण माहौल रहा और लोगों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को बुलंद किया। समिति ने सरकार से मांग की है कि स्मार्ट मीटर की जगह पुरानी मीटर प्रणाली को बहाल किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
इस आंदोलन को जिस तरह से जनता का व्यापक समर्थन मिला है, उससे यह स्पष्ट है कि लोग स्मार्ट मीटर योजना से असंतुष्ट हैं और इसके खिलाफ एकजुट हैं। यदि सरकार ने समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन के और उग्र होने की संभावना है।