दृष्टि बाधित महिला मतदान करने जाते
- फोटो : अमर उजाला
आंखों की रोशनी नहीं, लेकिन लोकतंत्र के महापर्व में भागीदारी का जज्बा बरकरार। ऐसा नजारा भवानीमंडी उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत श्री छतरपुरा में मतदान के दौरान देखने को मिला, जहां एक महिला की लोकतंत्र के प्रति आस्था सामने आई। दोनों आंखों से दिखाई नहीं देने के बावजूद 50 वर्षीय गंगाबाई अपने पति के सहारे मतदान केंद्र पहुंचीं और अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
पति का सहारा लेकर पहुंचीं मतदान केंद्र
गंगाबाई पत्नी मांगीलाल नायक, निवासी आमलिया का खेड़ा, बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं। इसके बावजूद मतदान करने की इच्छा ने उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। पत्नी की इच्छा का सम्मान करते हुए पति मांगीलाल उन्हें सहारा देकर मतदान केंद्र लेकर पहुंचे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने दंपती का वीडियो भी बनाया।
शारीरिक परेशानी भी नहीं रोक सकी मतदान का जज्बा
गंगाबाई के लिए रोजमर्रा के कामों से लेकर कहीं आने-जाने तक में पति का सहारा महत्वपूर्ण है। मतदान के दिन भी मांगीलाल अपनी पत्नी को सहारा देकर मतदान केंद्र तक लेकर पहुंचे। शारीरिक परेशानी के बावजूद मतदान के प्रति गंगाबाई का उत्साह लोकतंत्र में उनकी आस्था को दर्शाता है। उनका यह प्रयास दूसरे मतदाताओं के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है कि हर वोट लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
पेंशन के सहारे चल रहा दंपती का जीवन
ग्रामीणों के अनुसार, गंगाबाई बचपन से ही देख नहीं सकतीं। घर के कामकाज और बाजार या बैंक जैसे जरूरी कार्यों के लिए भी वह पति के सहारे आती-जाती हैं। मांगीलाल पहले कृषि क्षेत्र में मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते थे, लेकिन अब दंपती पेंशन के सहारे अपना जीवनयापन कर रहे हैं।
गंगाबाई ने दिया लोकतंत्र में भागीदारी का संदेश
सीमित संसाधनों और रोजमर्रा की चुनौतियों के बीच गंगाबाई का मतदान केंद्र पहुंचना मताधिकार के महत्व को रेखांकित करता है। उनका जज्बा बताता है कि लोकतंत्र में भागीदारी के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है।