माता के मंदिर में 9 दिन तक पुलिस देती है पहरा
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झालावाड़ जिले के असनावर के पास मुकंदरा की पहाड़ियों के बीच बसे लावासल गांव में स्थित मां रातादेवी का मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के नौ दिनों में यहां श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ता है। सिर्फ जिले ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रामनवमी के अवसर पर यहां भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।
नौ दिनों तक पुलिस देती है पहरा
इस मंदिर की खास बात यह है कि नवरात्रि के पूरे नौ दिन यहां पुलिस का कड़ा पहरा रहता है। पहले दिन झालरापाटन तहसील की ट्रेजरी से माता के श्रृंगार के लिए आभूषण विधिवत तरीके से लाए जाते हैं। पूजा-अर्चना के बाद माता का श्रृंगार किया जाता है और इसके बाद पुलिस गार्ड लगातार नौ दिनों तक इन आभूषणों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। नवरात्रा समाप्त होने पर दशहरे के दिन ये आभूषण वापस ट्रेजरी में जमा कर दिए जाते हैं।
खींची वंश की कुलदेवी हैं मां रातादेवी
मां रातादेवी को खींची राजवंश की कुलदेवी माना जाता है, इसलिए इस वंश के सदस्य यहां विशेष रूप से पूजा-अर्चना करने आते हैं। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर में देशी घी के दीये लगातार जलते रहते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, यही कारण है कि कई श्रद्धालु नंगे पैर पैदल यात्रा कर यहां पहुंचते हैं।
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मंदिर परिसर में लगता है मेला
नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में मेला भी लगता है, जहां पूजा सामग्री से लेकर अन्य वस्तुओं की दुकानें सजती हैं। हाड़ौती क्षेत्र के अलावा मध्य प्रदेश से भी व्यापारी यहां दुकानें लगाने आते हैं। अष्टमी पर हवन और भंडारे का आयोजन होता है, जबकि नवमी पर कन्या पूजन और कन्या भोज किया जाता है।
35 लाख की लागत से तैयार हो रहा डोम
श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में करीब 35 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक डोम का निर्माण किया जा रहा है। यह डोम 125 फीट लंबा, 82 फीट चौड़ा और 31 फीट ऊंचा होगा, जिसमें बैठने की व्यवस्था, गार्डन, सीसीटीवी कैमरे और बेहतर जल निकासी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।