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झालावाड़ निकाय चुनाव: टिकट को लेकर भाजपा-कांग्रेस में खींचतान, बागियों के डर से अंतिम समय तक सूची अटकी

Sun, 30 Aug 2026 07:46 AM IST
झालावाड़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़

सार

झालावाड़ नगर परिषद समेत जिले की आठ निकायों में होने वाले चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के सामने टिकट वितरण बड़ी चुनौती बन गया है। शहर के 45 वार्डों में कई दावेदारों और संभावित बगावत के डर से दोनों दलों ने शनिवार तक उम्मीदवारों की अधिकृत सूची जारी नहीं की।
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फाइल फोटो (भाजपा कांग्रेस और नगरपरिषद झालावाड़) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नगर परिषद झालावाड़ समेत जिले की आठ निकायों में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शहर के 45 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने टिकट वितरण बड़ी चुनौती बन गया है। संभावित उम्मीदवारों की लंबी सूची, कई वार्डों में पांच से अधिक दावेदार और बगावत की आशंका के चलते शनिवार को निर्धारित समय तक दोनों प्रमुख दल अपने संभावित उम्मीदवारों की अधिकृत सूची जारी नहीं कर सके। दोनों दलों के नेता पर्दे के पीछे अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। माना जा रहा है कि 31 अगस्त को नामांकन के अंतिम दिन पार्टी सिंबल के साथ ही उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है, ताकि बागियों को निर्दलीय मैदान में उतरने का मौका न मिले।

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जिलेभर में राजनीतिक दल चुनावी समीकरण साधने और जोड़-तोड़ में जुटे हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ-साथ शनिवार को झालावाड़ नगर परिषद सहित जिले की अन्य सात निकायों में भी नामांकन दाखिल किए गए। झालावाड़ में सभापति का पद ओबीसी के लिए आरक्षित घोषित होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता टिकट वितरण को लेकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं।

झालावाड़ जिले में 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में आठ निकायों के चुनाव होंगे। पिछले कार्यकाल में नगर परिषद का बोर्ड भाजपा के पास रहा है। ऐसे में भाजपा एक बार फिर नगर परिषद झालावाड़ में अपना बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि कांग्रेस भी यहां अपना बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त है। अभ्यर्थी सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष नामांकन पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे।
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सूत्रों के अनुसार, झालावाड़ में सभापति पद के संभावित दावेदार अपने समर्थकों और चहेते लोगों को टिकट दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं। टिकट को लेकर कई गुट सक्रिय हैं। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल फिलहाल गुपचुप तरीके से रणनीति बनाने में जुटे हैं।

वार्ड बदलने से बढ़ी नाराजगी, बगावत का डर

पिछले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के टिकट पर जीतकर आए कई दिग्गज पार्षद पार्टी में सक्रिय हैं, लेकिन इस बार वार्डों के आरक्षण में बदलाव के कारण उन्हें पड़ोसी वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी करनी पड़ रही है। ऐसे में संबंधित वार्डों के स्थानीय संभावित उम्मीदवार इन दिग्गजों के विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं।

दोनों प्रमुख दलों को आशंका है कि टिकट नहीं मिलने पर बागी उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। इसके अलावा अन्य राजनीतिक दलों के उम्मीदवार भी चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण भाजपा और कांग्रेस अपनी रणनीति सार्वजनिक करने से बच रही हैं और अभी तक संभावित उम्मीदवारों की सूची भी जारी नहीं की गई है।

नामांकन में भाजपा के संभावित दावेदार आगे

जिले में झालावाड़ नगर परिषद के अलावा सात अन्य निकाय हैं। अब तक 139 उम्मीदवारों की ओर से कुल 140 नामांकन आवेदन पेश किए जा चुके हैं। नामांकन दाखिल करने के मामले में भाजपा के संभावित दावेदार आगे दिखाई दे रहे हैं। जिले की आठ निकायों में अब तक भाजपा की ओर से 83, कांग्रेस की ओर से 41, जबकि आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से चार-चार नामांकन दाखिल किए गए हैं। वहीं, डग, खानपुर और मनोहरथाना में पहली बार निकाय चुनाव हो रहे हैं। हालांकि अभी यह तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है कि कौन किस पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार है। अंतिम दिन पार्टी की ओर से सिंबल दिए जाने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

वीआईपी जिले में शामिल है झालावाड़

झालावाड़ जिले की राजनीति में निकाय चुनाव का परिणाम सामान्य राजनीतिक मुकाबले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि झालावाड़ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गृह निर्वाचन जिला है। ऐसे में भाजपा की ओर से जिले की अधिकांश निकायों में बोर्ड बनाने के लिए बूथ स्तर तक अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

वहीं, वसुंधरा राजे के बेटे और झालावाड़-बारां सांसद दुष्यंत सिंह भी इसी जिले से हैं। इसके चलते झालावाड़ की राजनीति को प्रदेश की वीआईपी राजनीतिक सीटों में गिना जाता है। दूसरी ओर, कांग्रेस के टिकट वितरण में पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया का हस्तक्षेप भी देखा जा रहा है।

सामान्य सीटों पर सामान्य वर्ग को टिकट देने की मांग

झालावाड़ जिले में होने वाले नगर परिषद और नगर पालिका चुनावों में सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित सीटों पर सामान्य वर्ग के कार्यकर्ताओं को ही टिकट देने की मांग उठी है। विप्र फाउंडेशन की ओर से इस संबंध में भाजपा और कांग्रेस के जिलाध्यक्षों को ज्ञापन भेजा गया है। विप्र फाउंडेशन प्रदेश मुख्य संगठन महामंत्री विकास भार्गव, जिलाध्यक्ष दीपेश जोशी, परशुराम सेवा संस्थान अध्यक्ष सुरेशचंद्र शुक्ला, विप्र फाउंडेशन युवा जिलाध्यक्ष अजय शर्मा, महिला जिलाध्यक्ष बरखा शर्मा, मुख्य संगठन महामंत्री प्रणव शर्मा और युवा मुख्य संगठन महामंत्री सन्नी पंडित ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की घोषित नीति है कि सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित सीटों पर सामान्य वर्ग के योग्य, कर्मठ और समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने कहा कि जानकारी मिल रही है कि कई जगहों पर सामान्य सीटों पर अन्य वर्गों के लोगों को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी की जा रही है। विप्र फाउंडेशन के मीडिया प्रभारी ललित शर्मा ने बताया कि इससे सामान्य वर्ग में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य वर्ग की अनदेखी की गई तो संबंधित राजनीतिक दलों को चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

अब निगाह 31 अगस्त पर है, जब नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख के साथ भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। टिकट वितरण के बाद बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी चुनावी समीकरण पर बड़ा असर डाल सकती है।

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