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Jhalawar News: रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना में बड़ा कदम, श्यामपुर-कुरावर रेलखंड का होगा सीआरएस निरीक्षण

Fri, 12 Jun 2026 05:16 PM IST
झालावाड़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़

सार

हाड़ौती और मालवा क्षेत्र को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना में एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा होने जा रहा है। श्यामपुर-कुरावर रेलखंड के सीआरएस निरीक्षण के साथ परियोजना के संचालन की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं।
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रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाड़ौती और मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी का सपना साकार होने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ गया है। बहुप्रतीक्षित रामगंजमंडी-भोपाल नई बड़ी रेल लाइन परियोजना के तहत निर्मित मध्यप्रदेश के श्यामपुर-कुरावर रेलखंड का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), मुंबई द्वारा संरक्षा निरीक्षण किया जाएगा। यह निरीक्षण रेलखंड के संचालन से पहले की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है।

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वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने बताया कि कुल 276 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना में रामगंजमंडी से ब्यावरा तक लगभग 165 किलोमीटर रेलखंड कोटा मंडल के अधीन आता है। परियोजना का निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नयागांवपुरा कुमार-खिलचीपुर, जरखेड़ा-श्यामपुर तथा खिलचीपुर-राजगढ़ सिटी रेलखंडों का सीआरएस निरीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब श्यामपुर-कुरावर रेलखंड का निरीक्षण किया जाएगा।

सीआरएस निरीक्षण के दौरान रेलखंड पर ट्रैक, पुल, सिग्नलिंग व्यवस्था और अन्य तकनीकी संसाधनों की विस्तृत जांच की जाएगी। इसके लिए विशेष परीक्षण ट्रेनों का उच्च गति से संचालन भी किया जाएगा, ताकि रेल लाइन की क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन किया जा सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया किसी भी नए रेलखंड को यात्री और मालगाड़ियों के संचालन के लिए अनुमति मिलने से पहले अनिवार्य होती है।
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कोटा-भोपाल के बीच घटेगी दूरी
यह नई रेल लाइन कोटा, झालावाड़, राजगढ़, सीहोर और भोपाल जिलों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। वर्तमान में कोटा और भोपाल के बीच रेल यात्रा नागदा-उज्जैन या बीना मार्ग से होती है, लेकिन नई लाइन शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच रेल दूरी में लगभग 100 किलोमीटर की कमी आएगी। इसके साथ ही यात्रियों के यात्रा समय में भी करीब 2 से 3 घंटे की बचत होने की संभावना है।

माल परिवहन को भी मिलेगा लाभ
इस परियोजना का लाभ केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। झालावाड़ स्थित कालीसिंध ताप विद्युत परियोजना तक कोयला परिवहन का मार्ग भी लगभग 42 किलोमीटर छोटा हो जाएगा, जिससे माल परिवहन अधिक तेज और किफायती बन सकेगा। रेलवे का मानना है कि इससे उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा तथा परिवहन लागत में कमी आएगी।
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क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति
रेल लाइन के पूर्ण होने पर कोटा जिले के रामगंजमंडी तथा झालावाड़ जिले के झालरापाटन, असनावर, अकलेरा और घाटोली सहित मध्यप्रदेश के भोजपुर एवं खिलचीपुर जैसे क्षेत्रों को बेहतर रेल सुविधाएं मिलेंगी। नई रेल लाइन से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना को हाड़ौती और मालवा क्षेत्र की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

 

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