किसान संघ की बैठक में चर्चा करते किसान
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की लंबित राशि, सिंचाई परियोजनाओं की बदहाली और किसानों की अनदेखी को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने के संकेत दिए हैं। रविवार को कुष्मांडा माता मंदिर, झालरापाटन परिसर में आयोजित जिला बैठक में संगठन ने साफ कहा कि अब किसानों के साथ वादाखिलाफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जिले में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
170 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम अटका, किसानों में बढ़ा आक्रोश
बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का रहा। प्रांत मंत्री एवं जिला प्रभारी जगदीश खाती ने कहा कि वर्ष 2025 की खरीफ फसल खराब होने के बाद झालावाड़ जिले के लिए करीब 260 करोड़ रुपये की बीमा राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन आज भी लगभग 170 करोड़ रुपये किसानों के खातों में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बकानी महापड़ाव के दौरान प्रशासन ने चार दिन में भुगतान का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी अधिकांश किसानों को क्लेम नहीं मिला। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मेहनत की यह राशि जल्द जारी नहीं हुई तो भारतीय किसान संघ पहले से भी बड़ा आंदोलन करेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
"देशभर में चलेगा सदस्यता अभियान'
अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने कहा कि भारतीय किसान संघ केवल आंदोलन करने वाला संगठन नहीं, बल्कि किसानों की आवाज को गांव-गांव से सरकार तक पहुंचाने वाला सबसे बड़ा मंच बन रहा है। इसी उद्देश्य से आगामी वर्ष में देशव्यापी सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान संगठन से जुड़ सकें।
महिला किसानों के लिए दिल्ली में होगा एक लाख का महा सम्मेलन
संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि खेती की रीढ़ महिला किसान हैं। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर दिल्ली में एक लाख महिला किसानों का विराट सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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जर्जर सिंचाई परियोजना पर भी उठे सवाल, सितंबर में आंदोलन की चेतावनी
बैठक में हरिश्चंद्र सिंचाई परियोजना का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। लोगों का कहना है कि कालीसिंध नदी पर बना बांध लंबे समय से जर्जर हालत में है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई तो हजारों किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। जिला अध्यक्ष राधेश्याम ने कहा कि फसल बीमा, सिंचाई, समर्थन मूल्य और कृषि लागत जैसे मुद्दों पर सरकारों की गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि किसानों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो सितंबर में भारतीय किसान संघ एक बार फिर सड़कों पर उतरकर निर्णायक आंदोलन करेगा।