झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र के सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा का तीसरा चरण शनिवार दोपहर बकानी मंडल से शुरू हुआ। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने केसरिया झंडी दिखाकर पदयात्रा को रवाना किया।
जनसभा को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि केवल बकानी ही नहीं, बल्कि पूरा झालावाड़ जिला उनके परिवार का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि धन-दौलत सब कुछ नहीं होता, जनता का प्यार सबसे अनमोल है। उन्होंने आश्वस्त किया कि चार दिवसीय यात्रा के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी और जिले के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।
यात्रा के उद्देश्य पर दिया स्पष्टीकरण
वसुंधरा राजे ने कहा कि कई लोग उनसे पूछ रहे थे कि जब चुनाव नहीं हैं तो इस यात्रा का क्या उद्देश्य है। इस पर उन्होंने कहा कि हर राजनेता किसी न किसी कारण से यात्राएं करता है, लेकिन वे यात्रा के माध्यम से कुछ लेने नहीं, बल्कि जनता का प्यार लेकर जाने आई हैं। उन्होंने कहा कि वह लेने की नहीं, देने की इच्छा रखती हैं और यदि जनता का साथ मिला तो समय बदलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो दूर-दूर तक जाकर भी जनता के लिए लड़ेंगी।
सांसद दुष्यंत सिंह ने बताया संवाद का माध्यम
सांसद दुष्यंत सिंह ने कहा कि यह पदयात्रा आमजन से सीधे संवाद का माध्यम है। वे चार दिनों तक विभिन्न गांवों में पैदल भ्रमण कर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समाधान के निर्देश देंगे।
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जनसंवाद कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने, गांवों में इंटरलॉकिंग सड़क और नाली निर्माण, तथा जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक घर में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग रखी। दो दिन पूर्व तेज हवाओं और बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बकानी में किसानों ने अफीम सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराकर शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की। इस पर सांसद दुष्यंत सिंह ने अधिकारियों से चर्चा कर जल्द सर्वे और उचित मुआवजे के लिए पहल करने की बात कही।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष हर्ष वर्धन, श्याम सुंदर शर्मा, मनोहरथाना विधायक गोविन्द रानीपुरिया, पूर्व विधायक नरेंद्र नागर, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय जैन सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे। शुभारंभ से पहले बड़ाय स्थित खोयरा मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की गई।
बढ़ती सक्रियता पर राजनीतिक चर्चा
पूर्व मुख्यमंत्री का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे अब तक तीसरे चरण की तीसरी यात्रा के माध्यम से झालावाड़ पहुंच चुकी हैं। उनकी बढ़ती सक्रियता को लेकर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अपने पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह की तीसरी यात्रा के तहत बीती रात झालावाड़ पहुंची थीं, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद वे पदयात्रा में शामिल होने के लिए रवाना हुईं। सांसद दुष्यंत सिंह जिले की विभिन्न विधानसभाओं में मंडल स्तर पर यात्राएं कर आमजन और कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं।
कविता सुन रो पड़ीं वसुंधरा राजे
अपनी मां राजमाता विजय राजे सिंधिया, पिता जीवाजी राव सिंधिया और भाई माधव राव सिंधिया पर बकानी में एक युवा कवयित्री ने अपनी लिखी कविता सुनाई तो उसको सुन मंच पर ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मंच पर भावुक हो गईं, उनके आंसू निकल पड़े। बाद में वे भरे गले से बोलीं कि मेरे जीवन में इन तीनों (परिजनों) के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकती। आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है।
जानकारी के मुताबिक, यह अवसर था खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर मंदिर का, जहां शनिवार को सांसद दुष्यंत सिंह की पद यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत थी। एक युवती अदिति शर्मा बकानी ने राजे पर एक कविता पढ़ी और पूर्व सीएम भावुक हो गई आंख से आंसू निकल पड़े। इस कविता में श्रीमती राजे के संपूर्ण परिवार,उनके शासन करने के तरीके और उनकी योजनाओं के बारे में उल्लेख था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके माता-पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं। जब भी उनकी याद आती हैं, तब वे लोगों से मिल रहे प्यार में उनको खोजने लगती हैं और अहसास करती हैं कि इन्हीं में मेरे खोए हुए परिवारजन हैं। उन्होंने कहा कि वे बहुत भावुक हैं, जिन्हें धन-दौलत नहीं, जनता रूपी परिवार के प्यार की जरूरत है। जो उन्हें सर्वाधिक मिल रहा है। उनका लोगों से दल का नहीं दिल का रिश्ता है।
पूर्व सीएम ने सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को लेकर भी कहा कि इस यात्रा के कोई राजनीतिक मायने नहीं है। यह यात्रा है विकास के मार्ग पर चलने की। सबके साथ रहने की। सबके मन की बात जानने की।सबके सपनों को साकार करने की। यह यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं है, यह आपके क्षेत्र की खुशहाली की यात्रा है। लोगों को गले लगाने की यात्रा है। उनकी तकलीफ जानकर उसका निदान करने का प्रयास करने की यात्रा है। जिसका लक्ष्य है-सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। इस यात्रा का नारा है- सबका का सम्मान। सबका उत्थान और हर वाजिब समस्या का समाधान।