गीतकार और लेखक गुलजार का मानना है कि हम कुदरत को जिंदा मानेंगे, तो हमारा उससे रिश्ता अपने आप जुड़ जाएगा। गुलजार ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को कुदरत के इसी जादू को अपनी नज्मों के जरिये बयान किया।
फेस्टिवल में रविवार को गुलजार और पवन के. वर्मा का सत्र ‘नज्म उलझी है सीने में’ में सबसे ज्यादा भीड़ रही। डिग्गी पैलेस के फ्रंटलॉन में आयोजित इस सत्र में सुनने वाले इतने थे कि पैर रखने की जगह नहीं बची और गुलजार ने भी अपने चाहने वालों को कतई निराश नहीं किया। प्रकृति से इंसान के रिश्ते को समाने वाली नौ नज्में और छोटी कविताएं गुलजार ने सुनाईं।