फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्थान: पहले काटता था मरीजों की पर्चियां, फिर खरीद लिया 100 बेड का अस्पताल; फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार

Sat, 17 Oct 2026 09:45 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर

सार

राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर बनने और अस्पताल चलाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, जालोर जिले का आठवीं पास ननजी राम चौधरी पहले क्लीनिक और अस्पतालों में मरीजों की पर्चियां काटता था।
विज्ञापन
(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान में फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करने और अस्पताल चलाने का मामला सामने आया है। राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि एक आरोपी आठवीं पास है। उसने पहले निजी क्लीनिक और अस्पतालों में मरीजों की पर्चियां काटने का काम किया और बाद में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराकर अस्पताल खरीद लिया। वहीं, दूसरे आरोपी ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की, लेकिन भारत में डॉक्टर के रूप में अर्हता हासिल करने वाली परीक्षा में छह बार असफल होने के बाद बिहार के मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय के नाम से फर्जी डिग्री व अंकतालिका बनवा ली। एसओजी अब इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

पर्चियां काटने से शुरू हुआ सफर, फिर खरीद लिया पूरा अस्पताल

एसओजी के अनुसार, पहला आरोपी ननजी राम चौधरी जालोर जिले की रानीवाड़ा तहसील के रेल क्षेत्र गांव का रहने वाला है। उसने वर्ष 2010 में एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक पर मरीजों की पर्चियां काटने का काम शुरू किया था। इसके बाद उसने रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर भी काम किया। वर्ष 2014 में वह रानीवाड़ा के राजदेव अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने लगा।

विज्ञापन


इसी दौरान उसने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण करा लिया। इसके बाद वर्ष 2015 में उसने राजदेव अस्पताल खरीद लिया और वर्ष 2016 में उसका नाम बदलकर स्रोत अस्पताल कर दिया। आरोपी ने अस्पताल में 100 बेड की व्यवस्था की। आरोप है कि वह खुद भी मरीजों का इलाज करने और ऑपरेशन करने में शामिल होने लगा। जांच में सामने आया कि ननजी राम ने मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के लिए आंध्र प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी और मुंबई के कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स के नाम से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।

छह बार परीक्षा में फेल हुआ, फिर बनवा ली फर्जी एमबीबीएस डिग्री

दूसरा आरोपी पंकज यादव सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के कांवट का रहने वाला है। उसने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। विदेश से मेडिकल की डिग्री लेने के बाद भारत में डॉक्टर के रूप में अर्हता हासिल करने के लिए उसे फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास करनी थी। आरोप है कि पंकज ने यह परीक्षा छह बार दी, लेकिन हर बार असफल रहा। इसके बाद उसने कथित तौर पर बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नाम से फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका बनवा ली। उसने बिहार मेडिकल काउंसिल का फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र भी तैयार कराया। शैक्षणिक संस्थानों से दस्तावेजों का सत्यापन कराने के बाद एसओजी ने आरोपी को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया।

मेडिकल काउंसिल में शिकायत के बाद खुला मामला

इस मामले में जयपुर के अशोक नगर पुलिस थाने में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधारी गोपाल ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मामले की जांच एसओजी को सौंप दी गई। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि सात अन्य लोगों के खिलाफ भी नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने जांच में फर्जी पाए गए सभी पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं।

फर्जी डिग्री बनवाने वाले गिरोह की तलाश जारी

एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज और मेडिकल पंजीकरण प्रमाणपत्र किसकी मदद से तैयार कराए थे। जांच एजेंसी उन लोगों की तलाश कर रही है, जो इस पूरे नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कैसे हुआ और इस प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें