नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर 34 इस बार खासा चर्चित बना हुआ है। पॉश कॉलोनियों वाले इस वार्ड में सड़क, सीवरेज और नालियों जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति सामान्य है लेकिन परिसीमन के बाद इसमें जुड़े कृषि कुओं वाले नए हिस्से में कनेक्टिविटी और अन्य सुविधाओं को लेकर समस्याएं हैं। वार्ड में मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का निवास भी है। भाजपा ने यहां पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष के बेटे श्रीकांत भूतड़ा को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने माली समाज के पुखराज माली को चुनाव मैदान में उतारा है।
बता दें कि वार्ड नंबर 34 का बड़ा हिस्सा आदर्श नगर, पोलजी नगर, लक्ष्मी नगर और नागौर कॉलोनी जैसी पॉश कॉलोनियों में आता है। यहां नौकरीपेशा, कारोबारी और उद्योग से जुड़े परिवार बड़ी संख्या में रहते हैं। परिसीमन के बाद रेलवे क्रॉसिंग के आगे स्थित कृषि कुओं वाले क्षेत्र को भी वार्ड में शामिल किया गया है। पहले यह इलाका ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था लेकिन अब नगर परिषद का हिस्सा है। वार्ड के पुराने हिस्से में सड़क, सीवरेज और नालियों जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। वहीं परिसीमन के बाद जुड़े नए हिस्से में कनेक्टिविटी और दूसरी सुविधाओं को लेकर लोगों की शिकायतें हैं। ऐसे में चुनाव में यह इलाका प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
ये भी पढ़ें: उदयपुर: सांवलिया सेठ मंदिर में जन्माष्टमी की भव्य तैयारी, रात 8 बजे ड्रोन शो; 12 बजे आरती के बाद आतिशबाजी
राजनीतिक लिहाज से भी वार्ड 34 भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का घर इसी वार्ड में है। भाजपा ने श्रीकांत भूतड़ा को प्रत्याशी बनाया है। वे भाजपा के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष के बेटे हैं और मारवाड़ी युवा मंच जालौर के संस्थापक अध्यक्ष भी रह चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस ने पुखराज माली को टिकट दिया है। वे लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े बताए जाते हैं। पिछले दो नगर परिषद चुनावों में भाजपा ने इस वार्ड में जीत दर्ज की है। वर्ष 2019 में भाजपा के राजेंद्र टांक ने कांग्रेस के सीपी पुरोहित को 157 वोटों से हराया था। इससे पहले वर्ष 2014 में भाजपा के मानसिंह सिसोदिया पार्षद चुने गए थे, जबकि वर्ष 2009 में कांग्रेस के सुरेंद्र विश्नोई ने जीत दर्ज की थी।
परिसीमन के बाद वार्ड का जातीय समीकरण भी बदला है। वार्ड में कुल 774 मतदाता हैं, जिनमें 395 पुरुष और 379 महिलाएं शामिल हैं। माली समाज के मतदाताओं की संख्या पहले करीब 20 थी, जो अब बढ़कर 200 से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा सैन समाज के करीब 100, गुर्जर 80, ब्राह्मण 70, राजपूत 50, जाट 50, जैन 50, माहेश्वरी 40 और मुस्लिम समाज के करीब 20 मतदाता बताए गए हैं। ऐसे में इस बार वार्ड में मुकाबला भाजपा के प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े चेहरे और कांग्रेस के स्थानीय संगठन से जुड़े प्रत्याशी के बीच माना जा रहा है। माली समाज के मतदाताओं की बढ़ी संख्या कांग्रेस प्रत्याशी के लिए अहम मानी जा रही है। वहीं भाजपा के सामने वार्ड में लगातार तीसरी जीत दर्ज करने के साथ मुख्य सचेतक के वार्ड में पार्टी का दबदबा बनाए रखने की चुनौती है।