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Jalore: फर्जी डिग्री प्रकरण में दस्तावेजों का अंतिम सत्यापन, रिपोर्ट के बाद होगी गिरफ्तारी व निलंबन कार्रवाई

Thu, 26 Feb 2026 11:37 AM IST
जालौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर

सार

पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी बीपीएड डिग्री मामले में अब नामजद अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का अंतिम स्तरीय सत्यापन किया जाएगा। गड़बड़ी की पुष्टि होने पर एसओजी द्वारा गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। 
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फर्जी डिग्री प्रकरण में दस्तावेजों का अंतिम सत्यापन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्रियों के जरिए नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों पर अब कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। राजगढ़ एसओजी यूनिट द्वारा दर्ज प्रकरण में 47 अभ्यर्थियों और चूरू स्थित ओपीजेएस विश्वविद्यालय की भूमिका सामने आने के बाद अब जांच अगले चरण में पहुंच गई है। आगामी दिनों में नामजद अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का अंतिम स्तरीय सत्यापन किया जाएगा।

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प्रारंभिक जांच में ही बड़े स्तर पर गड़बड़ी उजागर हो चुकी है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने कथित रूप से फर्जीवाड़े के माध्यम से नौकरी प्राप्त की है, उन्हें एसओजी द्वारा डिटेन कर पूछताछ की जाएगी। गिरफ्तारी की कार्रवाई के लिए एसओजी यूनिट जालोर में कैंप करेगी। मामले में जालोर जिले के 6 अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) भंवरलाल परमार ने बताया कि एसओजी मुख्यालय से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दुराचरण की रिपोर्ट प्राप्त होते ही नामजद आरोपियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं एसओजी जांच अधिकारी देवेंद्रसिंह ने कहा कि सभी पक्षों को ध्यान में रखकर दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
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जांच में सामने आया है कि वर्ष 2016 से अब तक 1359 डिग्रियां जारी किए जाने का रिकॉर्ड मिला है, जबकि संबंधित अवधि में अधिकतम 500 डिग्रियां ही जारी की जा सकती थीं। यह संख्या मान्यता प्राप्त सीटों से लगभग तीन गुना अधिक है। प्रारंभिक स्तर पर विश्वविद्यालय की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
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इस पूरे प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि इतने वर्षों तक संबंधित विभाग और प्रशासन को इस गड़बड़ी की जानकारी क्यों नहीं हुई। जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

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