जालौर जिले में पिछले तीन-चार दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। मानसून विभाग द्वारा भारी बारिश के अलर्ट के बाद शनिवार को जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित हो गया। लगातार वर्षा के कारण जवाई बांध का जलस्तर बढ़ा और प्रशासन ने 9 गेट खोल दिए, जिससे जवाई और सुकड़ी नदियों में उफान आ गया।
सड़क और आवागमन प्रभावित
बारिश के चलते जिले के कई नदी-नाले उफान पर हैं। जालौर-आहोर मार्ग पर बनी पुलिया जलमग्न हो गई और यातायात बाधित हो गया। प्रशासन ने आमजन से नदी-नाले पार न करने की अपील की है। जिले के निचले इलाकों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव और तेज बहाव के कारण कई गांवों का संपर्क टूट चुका है।
किसानों को भारी नुकसान
बारिश के चलते मूंग और बाजरे की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई जगह खेतों में पानी जमा होने से फसलें बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अच्छी वर्षा के बावजूद बाढ़ जैसी स्थिति ने उनके जीवन और खेती को गंभीर चुनौती दी है।
जलस्रोत और बारिश का आंकड़ा
जवाई बांध शनिवार को 60 फीट तक भर गया, जबकि उसकी कुल क्षमता 6948 एमसीएफटी है। विभिन्न तहसीलों में भारी वर्षा दर्ज की गई है। जालोर तहसील में 202 मिमी, सांचोर में 210 मिमी, चितलवाना में 201 मिमी और आहोर में 102 मिमी बारिश हुई। जिले में औसतन 114.8 मिमी वर्षा हुई, जिससे इस मानसून सत्र की कुल वर्षा 698.7 मिमी हो गई है। जनवरी से अब तक कुल 738.8 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
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प्रशासन की तैयारियां और चेतावनी
जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है और आमजन से सतर्क रहने की अपील की गई है। नदी और नाले के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के प्रयास जारी हैं। वहीं, अच्छी वर्षा से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और खेतों में पानी भर जाने से सिंचाई के लिहाज से कुछ राहत भी मिली है।
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