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32 साल बाद सभापति सीट अनारक्षित: जालौर में निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज, दांव पर दिग्गजों की साख

Sat, 22 Aug 2026 07:00 AM IST
जालौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर

सार

जालौर नगर परिषद में सभापति पद के सामान्य होने से इस बार कई पुराने राजनीतिक चेहरों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस के लिए वार्डों में मजबूत प्रत्याशी उतारना चुनौती होगा, जबकि बहुमत के बाद ही सभापति की कुर्सी पर अंतिम फैसला होगा।
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जालौर निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले की एकमात्र नगर परिषद में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। करीब 32 साल बाद सभापति पद अनारक्षित यानी सामान्य वर्ग के लिए खुला है। लॉटरी में सीट सामान्य होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के सामने नए राजनीतिक समीकरण बनाने के साथ मजबूत दावेदारों को मैदान में उतारने की चुनौती बढ़ गई है। वहीं कई पुराने और सक्रिय नेता भी इस बार चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे नजर आ सकते हैं।

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40 वार्डों में 22 अनारक्षित
जालौर नगर परिषद में कुल 40 वार्ड हैं, जिनमें 22 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। सभापति पद सामान्य होने के चलते सामान्य वर्ग के कई दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। कई नेता अभी से राजनीतिक संपर्क मजबूत करने में जुट गए हैं, जबकि कुछ संभावित दावेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने की रणनीति भी बना सकते हैं।

प्रत्याशी चयन की चुनौती
सभापति पद सामान्य होने के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का फोकस सामान्य वर्ग के मतदाताओं के साथ-साथ मजबूत स्थानीय चेहरों पर रहेगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा और कांग्रेस ऐसे प्रत्याशियों की तलाश करेगी, जिनकी जनता के बीच स्वीकार्यता हो और अपने वार्ड में मजबूत पकड़ भी हो। हालांकि सभापति बनने के लिए सिर्फ व्यक्तिगत लोकप्रियता काफी नहीं होगी। सबसे पहले पार्षद का चुनाव जीतना और उसके बाद बोर्ड में बहुमत हासिल करना जरूरी होगा।
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बोर्ड बहुमत से तय होगी सभापति की राह
नगर परिषद में बोर्ड गठन के लिए स्पष्ट बहुमत महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे में सभापति पद के दावेदारों की राजनीतिक ताकत का आकलन उनके व्यक्तिगत जनाधार के साथ-साथ इस बात से भी होगा कि उनके समर्थन में कितने पार्षद जीतकर आते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक जोड़तोड़ और रणनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में सभापति पद की दौड़ चुनाव के साथ-साथ परिणाम के बाद भी रोचक रह सकती है।

जिला परिषद चुनाव पर भी नजर
स्थानीय निकाय चुनाव के बाद जिले में जिला परिषद चुनाव भी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। ऐसे में नगर परिषद चुनाव कई नेताओं के लिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का बड़ा अवसर माना जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों वार्ड स्तर पर जातीय, सामाजिक और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर प्रत्याशी चयन की रणनीति तैयार करेंगी।

वार्ड 27 सबसे बड़ा, वार्ड 18 सबसे छोटा
मतदाता संख्या के लिहाज से वार्ड 27 जालौर नगर परिषद का सबसे बड़ा वार्ड है। यहां कुल 1,672 मतदाता हैं, जिनमें 877 पुरुष और 795 महिला मतदाता शामिल हैं। वहीं वार्ड 18 सबसे छोटा वार्ड है, जहां कुल 618 मतदाता हैं। इनमें 316 पुरुष और 302 महिला मतदाता हैं। हालांकि चुनाव से पहले मतदाता सूची में कुछ बदलाव संभव हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से वार्ड 39 और 40 को सबसे बड़े वार्डों में माना जा रहा है।
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इस बार मुकाबला होगा ज्यादा दिलचस्प
सभापति पद के सामान्य होने से जालौर नगर परिषद का आगामी चुनाव पहले की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होने की संभावना है। टिकट वितरण, वार्ड स्तर के समीकरण और मजबूत दावेदारों की तलाश अब भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहम हो गई है। आने वाले दिनों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ने के साथ जालौर की स्थानीय राजनीति और गरमाने के आसार हैं।

 

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