पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सरकारी कर्मचारी शकूर खान को जयपुर से जैसलमेर लाकर पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम ने पूछताछ शुरू कर दी है। मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण केंद्र और राज्य की कई जांच एजेंसियां इसमें सक्रिय हो चुकी हैं।
रोजगार कार्यालय और निवास की खंगाली जानकारी
जैसलमेर पहुंचने के बाद जांच टीम सबसे पहले शकूर को जिला रोजगार कार्यालय लेकर गई, जहां उसके पदस्थापन, कार्य विवरण और विभागीय रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। इसके बाद टीम उसके निवास स्थान पर पहुंची और उसके संपर्कों व गतिविधियों की तस्दीक की। पुलिस टीम कई घंटे तक उसके घर पर मौजूद रही और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई। इसके बाद उसे सीआईडी कार्यालय ले जाया गया। इससे पहले जयपुर में कोर्ट ने शकूर को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था। अब जैसलमेर लाकर उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। वह 10 जून तक पुलिस रिमांड पर रहेगा।
मोबाइल डेटा से मिले अहम सुराग
सरकारी सेवा और राजनीतिक कनेक्शन भी जांच के दायरे में
शकूर खान ने वर्ष 2000 में चपरासी के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी और बाद में पदोन्नत होकर एएओ (सहायक लेखा अधिकारी) के पद तक पहुंचा। उसकी पदोन्नति प्रक्रिया भी अब जांच के घेरे में है। संदेह है कि इसमें राजनीतिक या बाहरी प्रभाव की भूमिका रही हो।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008 से 2013 तक शकूर तत्कालीन अल्पसंख्यक मामलात मंत्री सालेह मोहम्मद का निजी सहायक (PA) भी रहा। इस दौरान वह कई गोपनीय दस्तावेजों और बैठकों की जानकारी तक पहुंच रखता था। आशंका जताई जा रही है कि यहीं से संवेदनशील सूचनाएं लीक की गई होंगी। शकूर के बैंक खातों, लेन-देन, संपत्तियों और जैसलमेर में हुई आर्थिक गतिविधियों की भी गहराई से जांच की जा रही है। आय और संपत्ति में विसंगतियों के संकेत भी जांच एजेंसियों को मिले हैं।
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देशद्रोह और जासूसी के गंभीर आरोप
शकूर खान पर देशद्रोह, जासूसी और सामरिक सूचनाएं पाकिस्तान तक पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उसे आजीवन कारावास या इससे भी कठोर सजा हो सकती है। फिलहाल एजेंसियां कोई कसर नहीं छोड़ रहीं।
सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बड़े नेटवर्क की आशंका