जैसलमेर जिले में बकाया ऋण वसूली को लेकर दी जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। वर्षों से लंबित पड़े करोड़ों रुपये के ऋण की वसूली के लिए बैंक प्रशासन अब ऐसी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, जिसने बैंक ग्राहकों, किसानों और कानूनी विशेषज्ञों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
बैंक प्रबंधन के अनुसार जिन लोगों ने बैंक से ऋण लेकर लंबे समय से भुगतान नहीं किया है, उनके खिलाफ सार्वजनिक स्तर पर पहचान उजागर करने की कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं केवल ऋण लेने वाले ही नहीं बल्कि उनके ऋण के जमानतदारों को भी इस कार्रवाई के दायरे में लाने की योजना बनाई गई है।
350 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली चुनौती
दी जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) ओमपाल सिंह ने बताया कि बैंक के पास बड़ी संख्या में ऐसे खाते हैं, जिनमें लंबे समय से ऋण राशि जमा नहीं करवाई गई है। बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 100 करोड़ रुपये की राशि गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की श्रेणी में पहुंच चुकी है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं और अन्य ऋण खातों में भी भारी बकाया राशि लंबित है।
बैंक प्रशासन का दावा है कि कुल मिलाकर करीब 350 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है। यह राशि बैंक की वित्तीय स्थिति और भविष्य की ऋण वितरण क्षमता पर भी प्रभाव डाल रही है। ऐसे में बैंक अब वसूली अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है।
किसान योजनाओं और गैर-कृषि ऋणों की सूची तैयार
बैंक द्वारा वर्तमान में उन सभी खातों का डेटा संकलित किया जा रहा है, जिन्होंने विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण प्राप्त किया था लेकिन निर्धारित समयावधि में भुगतान नहीं किया। इनमें किसान सम्बल योजना, किसान कल्याण योजना, अल्पकालिक कृषि ऋण तथा गैर-कृषि ऋण शामिल हैं। प्रबंधन के अनुसार प्रत्येक शाखा से डिफॉल्टर खातों की जानकारी मंगवाई जा रही है और बड़े बकायादारों की अलग सूची तैयार की जा रही है। इस सूची के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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बैंक प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि कार्रवाई की शुरुआत बड़े ऋण बकायादारों के नाम सार्वजनिक करने से होगी। प्रारंभिक चरण में लगभग 25 बड़े डिफॉल्टरों के नाम समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाएंगे ताकि उन्हें भुगतान के लिए अंतिम अवसर दिया जा सके। इसके बाद भी यदि ऋण राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो अगले चरण में और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लगेंगे बड़े बोर्ड
बैंक की प्रस्तावित योजना के अनुसार वसूली अभियान के दूसरे चरण में शहर और कस्बों के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बड़े-बड़े होर्डिंग और सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों पर ऋण बकायादारों के नाम, फोटो और अन्य विवरण प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है। खास बात यह है कि बैंक केवल ऋणधारकों तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि ऋण की गारंटी देने वाले जमानतदारों के नाम भी सार्वजनिक करने पर विचार कर रहा है। बैंक का मानना है कि सामाजिक दबाव और सार्वजनिक जवाबदेही के माध्यम से बकाया राशि की वसूली को गति मिल सकती है।
बकायादारों को दी अंतिम चेतावनी
बैंक प्रशासन ने सभी ऋणधारकों से अपील की है कि वे समय रहते अपना बकाया ऋण जमा करवा दें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी व्यक्ति को अपमानित करने के उद्देश्य से नहीं बल्कि बैंक के डूबे हुए धन की वसूली और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है। प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि जिन लोगों के खाते लंबे समय से बकाया हैं, उन्हें नोटिस और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से पहले ही सूचित किया जा चुका है। अब यदि भुगतान नहीं होता है तो सार्वजनिक कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि बैंक की इस प्रस्तावित कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। जैसलमेर के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला बार एसोसिएशन के सदस्य हेमसिंह राठौड़ का कहना है कि ऋण डिफॉल्टरों और उनके जमानतदारों के फोटो सार्वजनिक स्थानों पर लगाने का स्पष्ट प्रावधान बैंकिंग कानूनों में दिखाई नहीं देता।
उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की तस्वीर और पहचान को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाता है तो इससे निजता और सम्मान से जुड़े कानूनी प्रश्न उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे मामलों में न्यायालय की व्याख्या और कानून के प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बैंक इस प्रकार की कार्रवाई करता है तो भविष्य में इस संबंध में कानूनी विवाद भी खड़े हो सकते हैं।