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Barmer-Jaisalmer LS Seat: रेतीले धोरों में किस करवट बैठेगा सियासत का ऊंट, भाटी को लेकर टेंशन में BJP-कांग्रेस

Fri, 31 May 2024 07:50 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर

सार

Barmer-Jaisalmer LS Seat: बीजेपी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी या नहीं। फिलहाल, यह प्रश्न भविष्य के गर्भ में है। लेकिन प्रत्याशी कैलाश चौधरी को दोनों ही प्रतिद्वंद्वियों की कड़ी चुनौती मिल रही है।
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राजस्थान लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला
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त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट के परिणाम इस बार सभी को चौंका सकते हैं। एक प्रभावशाली निर्दलीय के बीजेपी-कांग्रेस प्रत्याशियों को जबरदस्त टक्कर देने से इस सीट का चुनावी मुकाबला रोचक जरूर बना हुआ है। लेकिन इस क्षेत्र के चुनाव में सबसे ज्यादा प्रभाव जातिवाद का नजर आ सकता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र जैसे बड़े चेहरे, फिल्म अभिनेत्री कंगना रानौत सहित कई स्टार प्रचारकों के पूरी ताकत झोंकने के बाद बीजेपी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी या नहीं। फिलहाल यह प्रश्न भविष्य के गर्भ में है। लेकिन इसके प्रत्याशी कैलाश चौधरी को दोनों ही प्रतिद्वंद्वियों की कड़ी चुनौती मिल रही है। बाड़मेर-जैसलमेर सीट के प्रत्याशियों में सबसे चर्चित चेहरे बतौर निर्दलीय ताल ठोंकने वाले रविंद्र भाटी की सोशल मीडिया में फैंस फॉलोइंग जितनी जबरदस्त है, उतनी ही जमीनी स्तर पर भी। लेकिन भाटी को इसका कितना फायदा मिल पाएगा, यह चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा।

अप्रत्याशित परिणाम आ सकते हैं सामने
इन दोनों के अलावा राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इस लोकसभा सीट से साइलेंट मोड पर बढ़त हासिल कर कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेदाराम बेनीवाल के पक्ष में भी कोई अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण बेनीवाल की व्यक्तिगत छवि को माना जा रहा है। कुल मिलाकर बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र में कहीं पार्टी पर प्रत्याशी का चेहरा हावी है तो कहीं प्रत्याशी के चेहरे का पार्टी को नुकसान होने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में पार्टी बैनर से इतर निर्दलीय प्रत्याशी का पलड़ा चर्चाओं के बाजार में सबसे भारी नजर आ रहा है।
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जबरदस्त हुआ था मतदान
चेहरे और जातिवाद पर केंद्रित इस सीट पर चुनावी मुकाबले में विकास का मुद्दा गौण होता नजर आ रहा है। हालांकि, बरसोंं से मूलभूत सुविधाओं से वंचित सरहदी बाड़मेर और जैसलमेर जिले के मतदाता राजनीतिक दृष्टि से काफी जागरुक हैं। इसका अंदाजा इस सीट पर भीषण गर्मी के बावजूद जबरदस्त मतदान होने से ही लगाया जा सकता है।

चार जून को पूरे देश के साथ ही बाड़मेर-जैसलमेर के आगामी लोकसभा प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला भी हो जाएगा। इस बीच सट्टा बाजार, राजनीतिक विश्लेषकों के विश्लेषण, मीडिया और आमजन की रायशुमारी से सरहद की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। अब देखना यह है कि अधिकतम तापमान के सारे रिकॉर्ड तोड़ते बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र के रेतीले धोरों में सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा।

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