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हड़ताल पर हैं राजस्थान के ट्रांसपोर्टर्स: 10 हजार ट्रकों के पहिए थमे, VLTD से ई-चालान तक समझिए पूरा विवाद

Mon, 13 Jul 2026 09:16 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में VLTD, परमिट और ई-डिटेक्शन चालान के विरोध में ट्रांसपोर्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। करीब 10 हजार ट्रक खड़े हैं, जिससे माल ढुलाई और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
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ट्रक हड़ताल-सांकेतिक फोटो- - फोटो : ट्रक हड़ताल-सांकेतिक फोटो-
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विस्तार
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राजस्थान में ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े हजारों वाहन मालिक और ऑपरेटर रविवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। राजस्थान ट्रक ट्रांसपोर्ट संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर में करीब 10 हजार ट्रकों के पहिए थम गए हैं। इस हड़ताल को कई प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बस ऑपरेटर संगठनों का समर्थन मिला है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उनका विरोध नए नियमों से नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने की अव्यवस्थित व्यवस्था से है।

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ट्रांसपोर्टरों की मुख्य आपत्तियां
VLTD डिवाइस उपलब्ध नहीं, फिर भी नियम लागू
सरकार ने व्यावसायिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि अधिकृत कंपनियों के पास पर्याप्त डिवाइस ही उपलब्ध नहीं हैं। इससे हजारों ट्रकों का फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी काम अटक गया है। उनका कहना है कि पहले व्यवस्था पूरी की जाए, उसके बाद नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।

परमिट व्यवस्था से बढ़ रही परेशानी
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अस्थायी परमिट (टीपी) की मौजूदा व्यवस्था लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले वाहनों के लिए व्यावहारिक नहीं है। राजस्थान से केरल, तमिलनाडु, असम या अन्य राज्यों में जाने वाले ट्रकों को अलग-अलग राज्यों का टैक्स और परमिट लेना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत काफी बढ़ जाती है।
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ई-डिटेक्शन चालानों पर आपत्ति
संघर्ष समिति का कहना है कि ई-डिटेक्शन सिस्टम के जरिए लगातार चालान काटे जा रहे हैं। कई बार तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से भी वाहन मालिकों पर जुर्माना लग जाता है। ट्रांसपोर्टर इस व्यवस्था में सुधार और राहत की मांग कर रहे हैं।

हर जिले में फिटनेस सेंटर की मांग
वाहन मालिकों का कहना है कि फिटनेस जांच के लिए उन्हें दूसरे शहरों तक जाना पड़ता है। उनकी मांग है कि प्रत्येक जिले में वाहन फिटनेस सेंटर खोले जाएं ताकि समय और खर्च दोनों की बचत हो सके।

किन संगठनों ने दिया समर्थन?
हड़ताल को लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LTOA), जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन, विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, जयपुर परचून ट्रांसपोर्ट यूनियन और ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर एसोसिएशन सहित कई संगठनों का समर्थन मिला है।

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क्या होगा असर?
यदि हड़ताल लंबी चली तो प्रदेश में सीमेंट, स्टील, किराना, कृषि उपज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ट्रांसपोर्ट संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा।

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