स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, राजस्थान (SOG) ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए डमी अभ्यर्थियों के संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। विशाल बंसल, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG), राजस्थान, बताया कि जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थी खुद परीक्षा पास करने में असमर्थ होने के कारण अधिक योग्य व्यक्तियों को अपनी जगह बैठाकर अवैध रूप से चयन करवाने की साजिश रच रहे थे।
पहला मामला राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन द्वारा आयोजित प्राध्यापक हिन्दी (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। इसमें एक सरकारी शिक्षक ने मूल अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दी। दोनों के बीच करीब 5 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। परीक्षा के दौरान प्रवेश पत्र और उपस्थिति पत्रक में फोटो व हस्ताक्षर में हेरफेर किया गया। आरोपी को 1 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया, जबकि मूल अभ्यर्थी फरार है।
दूसरा मामला भी इसी परीक्षा से संबंधित है, जिसमें एक भूतपूर्व सैनिक ने कम मेरिट का फायदा उठाने के लिए डमी अभ्यर्थी की मदद ली। इस सौदे की रकम लगभग 7.5 लाख रुपये तय हुई थी। पुलिस पहले ही मूल अभ्यर्थी को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि डमी उम्मीदवार को 30 अप्रैल 2026 को पकड़ा गया।
तीसरा मामला राजस्थान स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड द्वारा आयोजित शारीरिक शिक्षक भर्ती-2022 से संबंधित है। इसमें एक मध्यस्थ ने डमी अभ्यर्थी की व्यवस्था कर परीक्षा दिलवाई। लगभग 6 लाख रुपये का सौदा हुआ, जिसमें से 1.5 लाख अग्रिम दिए गए। इस मामले में डमी अभ्यर्थी और मध्यस्थ दोनों को 1 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया।
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SOG के अनुसार, इन मामलों में दस्तावेजों में बेहद सावधानी से हेरफेर किया गया था, जिससे पहचान करना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, विशेष सॉफ्टवेयर और उन्नत विश्लेषण तकनीकों की मदद से आरोपियों की पहचान संभव हो सकी।
सभी मामलों में आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120B, राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2022 और आईटी एक्ट 2008 के तहत केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है और पूछताछ जारी है।