आज राजस्थान की सबसे बड़ी खबर आईएएस शिखर अग्रवाल हैं। उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में 40 विला-कॉटेज खरीदने और फिर इन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने के मामले में विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने देर रात शिखर को एपीओ कर दिया।
कौन हैं शिखर अग्रवाल?
शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका गृह नगर कानपुर है। उन्होंने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में चयन के बाद वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए और राजस्थान कैडर में नियुक्त हुए।
उनके प्रशासनिक करियर में जिला प्रशासन, शहरी विकास, जल संसाधन, उद्योग, निवेश और मुख्यमंत्री कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भी काम कर चुके हैं।
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कब बने IAS और कहां मिली पहली पोस्टिंग?
शिखर अग्रवाल 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनकी शुरुआती पोस्टिंग त्रिपुरा में रही। उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर 1995 में उन्हें दक्षिण त्रिपुरा में एसडीओ/एसडीएम की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद अप्रैल 1997 में वे धलाई जिले में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) के परियोजना निदेशक बने। जून 1998 में उन्हें उत्तर त्रिपुरा में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी दी गई।
अक्टूबर 1998 में राजस्थान कैडर में आने के बाद उन्होंने राज्य में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर काम किया। शुरुआती दौर में वे कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग में उप सचिव और वित्त विभाग में उप सचिव रहे। अगस्त 1999 में उन्हें जयपुर में अतिरिक्त कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट बनाया गया।
जालोर से जयपुर तक संभालीं अहम जिम्मेदारियां
शिखर अग्रवाल को जुलाई 2000 में जालोर का कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने हनुमानगढ़, उदयपुर और बीकानेर में भी कलेक्टर के रूप में काम किया। जिला प्रशासन में काम करने के बाद वे अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और उद्योग विभाग में उप सचिव रहे।
2009 से 2014 तक दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर रहे
वर्ष 2009 में वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। वहां उन्होंने राजस्व विभाग में निदेशक, प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद से जुड़े सलाहकार के निजी सचिव और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशक की जिम्मेदारी संभाली।
फरवरी 2014 में राजस्थान लौटे
फरवरी 2014 में राजस्थान लौटने के बाद उन्हें जयपुर विकास प्राधिकरण का आयुक्त बनाया गया। इसके बाद वे जल संसाधन विभाग के सचिव और प्रमुख सचिव रहे। आगे चलकर राजस्व मंडल, जनजातीय क्षेत्र विकास विभाग, राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण और वन एवं पर्यावरण विभाग में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
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40 विला-कॉटेज की खरीद से क्यों उठे सवाल?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर और परिवार के सदस्यों ने उदयपुर के बुझाड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 कॉटेज और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे। दोनों सौदों की कुल कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उदयपुर में कॉटेज की रजिस्ट्री सितंबर 2023 में और अलवर में विला की रजिस्ट्री मार्च 2026 में हुई। खरीद के बाद इन संपत्तियों को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को ही लीज पर देने की बात सामने आई। दावा है कि इस व्यवस्था से सालाना करीब 1.80 करोड़ रुपये की आय होनी थी। इस मामले में संपत्ति खरीद की कीमत, लीज की शर्तों, परिवार के अचल संपत्ति विवरण और संबंधित कंपनी के साथ हुए समझौतों को लेकर सवाल उठे हैं।
उसी कंपनी को मिला निवेश प्रोत्साहन पैकेज
विवाद का दूसरा पहलू गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को मिला निवेश प्रोत्साहन पैकेज है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी को अलवर में होटल-रिसॉर्ट परियोजना के लिए RIPS के तहत विशेष रियायतें दी गईं। परियोजना में कम से कम 115 करोड़ रुपये के निवेश और 241 लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव बताया गया है। पैकेज में राज्य कर से जुड़ी निवेश सब्सिडी और विद्युत शुल्क में छूट जैसे लाभ शामिल बताए गए हैं।
जेडीए आयुक्त रहते हुए भी विवादों में आए
शिखर अग्रवाल का बतौर जेडीसी वाला कार्यकाल भी काफी विवादों भरा रहा। फरवरी 2014 से नवंबर 2016 तक जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त रहे। उनके कार्यकाल में कई फैसलों को लेकर विरोध और कानूनी विवाद हुए।
राजमहल पैलेस होटल पर कार्रवाई
अगस्त 2016 में जेडीए ने जयपुर के राजमहल पैलेस होटल के आसपास की जमीन पर कार्रवाई की और होटल के तीन गेट सील कर दिए। उस समय शिखर अग्रवाल जेडीए आयुक्त थे। पूर्व राजपरिवार की सदस्य और तत्कालीन भाजपा विधायक दीया कुमारी ने कार्रवाई का विरोध किया था। जमीन पर अधिकार को लेकर विवाद अदालत तक पहुंचा। सितंबर 2016 में अदालत के निर्देशों के बाद गेट खोले गए और तोड़े गए निर्माणों को लेकर भी आदेश दिए गए।
मेट्रो के लिए मंदिर हटाने पर विरोध
जयपुर मेट्रो परियोजना के रास्ते में आने वाले मंदिरों को हटाने की कार्रवाई पर भी विरोध हुआ। स्थानीय लोगों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठनों ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद कुछ मंदिरों के पुनर्निर्माण का निर्णय भी चर्चा में रहा। यह मामला उस समय शहर में धार्मिक स्थलों और विकास परियोजनाओं के बीच टकराव के उदाहरण के रूप में सामने आया।
रिंग रोड और जमीन अधिग्रहण
जेडीए के रिंग रोड प्रोजेक्ट के दौरान जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर भी विवाद और विरोध सामने आए। जयपुर में पालसिया अपार्टमेंट के नक्शे रद्द करने का फैसला भी उनके जेडीए कार्यकाल के चर्चित मामलों में शामिल रहा।
शिखर अग्रवाल का पोस्टिंग रिकॉर्ड
- 1 जून 1994 से 1 सितंबर 1995: दक्षिण त्रिपुरा में असिस्टेंट कलेक्टर।
- 1 सितंबर 1995 से 13 मई 1997: दक्षिण त्रिपुरा में एसडीओ/एसडीएम।
- 1 अप्रैल 1997 से 1 जून 1998: त्रिपुरा के धलाई जिले में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) के परियोजना निदेशक।
- 1 जून 1998 से 1 अक्टूबर 1998: उत्तर त्रिपुरा में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM)।
- 24 अक्टूबर 1998 से 23 जनवरी 1999: राजस्थान सचिवालय में कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग में उप सचिव।
- 23 जनवरी 1999 से 25 अगस्त 1999: राजस्थान सचिवालय में वित्त विभाग में उप सचिव।
- 26 अगस्त 1999 से 15 जुलाई 2000: जयपुर में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर।
- 17 जुलाई 2000 से 31 मई 2002: जालोर के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट।
- 1 जून 2002 से 30 मई 2003: हनुमानगढ़ के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट।
- 31 मई 2003 से 19 जनवरी 2004: राजस्थान सचिवालय में उद्योग विभाग में उप सचिव।
- 19 जनवरी 2004 से 27 जून 2005: अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक।
- 28 जून 2005 से 5 नवंबर 2007: उदयपुर के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट।
- 15 नवंबर 2007 से 5 फरवरी 2008: जयपुर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के विशेष सचिव।
- 6 फरवरी 2008 से 31 दिसंबर 2008: बीकानेर के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट।
- 1 जनवरी 2009 से 29 मार्च 2009: अजमेर में राजस्व मंडल के सदस्य।
- 30 मार्च 2009 से 17 अक्टूबर 2011: केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में निदेशक, नई दिल्ली।
- 18 अक्टूबर 2011 से 31 मई 2013: प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद से जुड़े निजी सचिव।
- 31 मई 2013 से 31 जनवरी 2014: केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशक।
- 4 फरवरी 2014 से 7 नवंबर 2016: जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के आयुक्त।
- 7 नवंबर 2016 से 20 जनवरी 2017: राजस्थान सचिवालय में जल संसाधन विभाग के सचिव।
- 20 जनवरी 2017 से 19 दिसंबर 2018: जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव।
- 1 जनवरी 2009 से 29 मार्च 2009 के बाद के रिकॉर्ड में, 31 दिसंबर 2018 से 2 नवंबर 2020: अजमेर में राजस्व मंडल के सदस्य।
- 2 नवंबर 2020 से 15 नवंबर 2021: जनजातीय क्षेत्र विकास विभाग के प्रमुख सचिव।
- 15 नवंबर 2021 से 16 अप्रैल 2022: राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष।
- 18 अप्रैल 2022 से 31 दिसंबर 2022: वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव।
- फरवरी 2024: राजस्थान के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव बने।
- नवंबर 2025: उद्योग, निवेश और औद्योगिक विकास से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी मिली।
- अक्टूबर 2026: एपीओ (Awaiting Posting Orders) किए गए।