राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए देश की रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
जैसलमेर में बैठक का उद्देश्य, सीमावर्ती सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा
रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली से बाहर जैसलमेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित करने का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को जमीनी परिस्थितियों से रूबरू कराना है। समिति के सदस्यों की सलाह पर ही बैठक के लिए इस स्थान का चयन किया गया, ताकि अग्रिम इलाकों में मौजूद सुरक्षा चुनौतियों का बेहतर आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि दिल्ली से दूर ऐसे माहौल में जनप्रतिनिधियों को आपस में संवाद करने और विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर मिलता है। भारत की पश्चिमी सीमा के नजदीक स्थित जैसलमेर में इस बैठक को सीमाओं की सुरक्षा और भविष्य की रक्षा रणनीतियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेना की संरचना में बदलाव, अग्नि-भैरव और शक्तिबाण जैसी नई इकाइयां
राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलती युद्ध पद्धतियों और नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना के ढांचे और उसकी विभिन्न इकाइयों में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। इसी दिशा में सेना के भीतर अग्नि, भैरव और शक्तिबाण जैसी आधुनिक सैन्य संरचनाओं का गठन किया गया है।
इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय सेना को तकनीक और आधुनिक रक्षा संसाधनों से लैस करना है, ताकि वह हर तरह की विषम परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके। रक्षा मंत्री के अनुसार, इन नए प्रयोगों से सेना की कार्यक्षमता और अभियान चलाने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
हर इंफैंट्री बटालियन में होगी अलग ड्रोन यूनिट
सशस्त्र बलों की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना की प्रत्येक इंफैंट्री बटालियन में एक अलग ड्रोन यूनिट शामिल करने की योजना है। इससे पैदल सैनिकों को दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए दूसरी सैन्य इकाइयों या बाहरी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
ड्रोन यूनिट की मदद से सैनिकों को युद्ध क्षेत्र की निगरानी और दुश्मन की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने में आसानी होगी। इससे सैन्य अभियानों के दौरान त्वरित निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होगी।
भैरव यूनिट की तर्ज पर तैयार होंगी 25 बटालियन
रक्षा मंत्री ने भैरव यूनिट की भूमिका और महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि ऐसी विशिष्ट सैन्य इकाइयों के गठन से छोटे और सीमित सैन्य अभियानों के दौरान विशेष बलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
भारतीय सेना की योजना भविष्य में भैरव यूनिट की तर्ज पर कुल 25 बटालियन तैयार करने की है। इन इकाइयों के गठन का उद्देश्य सेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाना और बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप सैन्य ढांचे को अधिक सक्षम बनाना है।