राजस्थान सरकार 21 मार्च को विश्व वन दिवस पर सात प्रे-बेस ऑग्मेंटेशन सेंटर शुरू करेगी। इन केंद्रों में चीतल जैसे शाकाहारी जीवों का पालन होगा। बाद में इन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा, जिससे बाघ-तेंदुओं को शिकार मिलेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।
राजस्थान में बाघ और तेंदुओं के इंसानों पर बढ़ते हमलों को देखते हुए अब सरकार प्रदेश में 7 नए प्रे-बेस सेंटर शुरू करने जा रही है। इन प्रे-बेस सेंटर्स पर बाघ व तेंदुओं के प्राकृतिक शिकार की आबादी बढ़ाई जाएगी और बाद में इन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा ताकि बाघ और तेंदुओं का इंसानी आबादी की तरफ पलायन रोका जा सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं कम हों।
पहले चरण में बनाए जा रहे सात एनक्लोजर लगभग 15 से 20 हेक्टेयर क्षेत्र में होंगे और इनमें मुख्य रूप से चीतल (स्पॉटेड डियर) रखे जाएंगे। इन चीतलों को भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से लाकर इन केंद्रों में बसाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत करीब 2000 से 2500 चीतलों को स्थानांतरित करने की योजना है।
वन अधिकारियों का कहना है कि जब इनकी संख्या स्थिर हो जाएगी, तब इन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा। इससे बाघ और तेंदुए जैसे शिकारी जानवरों के लिए शिकार की उपलब्धता बढ़ेगी, पारिस्थितिक संतुलन मजबूत होगा और राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।