राजस्थान में वेटरीनरी कॉलेजों में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह सेंट्रलाइज और ऑनलाइन होगी। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में नई एसओपी जारी की गई। इसके तहत बी.वी.एससी एंड ए.एच., एम.वी.एससी और पीएचडी पाठ्यक्रमों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनियमितताओं को रोकने के लिए सात सदस्यीय सेंट्रल एडमिशन काउंसलिंग कमेटी का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता डॉ. हेमंत दाधीच करेंगे।
कमेटी प्रदेश के सभी सरकारी और निजी वेटरीनरी कॉलेजों में करीब 1,200 सीटों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित करेगी। सभी चरण डिजिटल माध्यम से होंगे और खाली बची सीटों के लिए मॉप-अप राउंड रखा जाएगा। कट ऑफ के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा, जबकि बची हुई सीटों की जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी।
मंत्री कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की जाएगी और गलत तरीके से प्रवेश देने वाली संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई होगी। बी.वी.एससी एंड ए.एच. कोर्स के लिए आरपीवीटी का परिणाम 25 अगस्त को घोषित होगा और सितंबर में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस बार 3 अगस्त को हुई परीक्षा में 9,670 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें लगभग 800 सीटें आरपीवीटी और 400 सीटें नीट के जरिए भरी जाएंगी।
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बैठक में भरतपुर, सिरोही और कोटा में प्रस्तावित वेटरीनरी कॉलेजों तथा जोधपुर के नवनिर्मित कॉलेज में इसी सत्र से प्रवेश सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही जोबनेर, राजूवास और श्रीगंगानगर की टांटिया यूनिवर्सिटी में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में शासन सचिव पशुपालन डॉ. समित शर्मा, उप सचिव डॉ. संतोष करोल, जोबनेर विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. त्रिभुवन शर्मा, राजूवास के कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के डीन और अधिकारी उपस्थित रहे।