झालावाड़ के पिपलोदी गांव में स्कूल भवन ढह जाने से हुई सात बच्चों की मौत के मामले में राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने झालावाड़ जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा निदेशक और एसपी को नोटिस जारी कर 7 अगस्त तक अनुपालना रिपोर्ट मांगी है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने घटना को हृदय विदारक बताते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और घायलों को तत्काल सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने नोटिस में लिखा है कि घटना के दोषियों को समुचित सजा मिले और मृतक छात्रों के परिवारों को यथायोग्य आर्थिक क्षतिपूर्ति दी जाए।
संसद में भी सुनाई दी घटना की गूंज
झकझोर कर रख देने वाली इस घटना को लेकर विपक्ष ने भाजपा पर जबरदस्त हमला बोला है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह नियम लाया जाना चाहिए कि नेताओं और नौकरशाहों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें, ताकि नेता और अधिकारी सरकारी स्कूलों पर ध्यान दें और वहां की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
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डोटासरा बोले- दुर्घटना नहीं आपराधिक लापरवाही
इधर कांग्रेस की तरफ से भी इस मुद्दे को लेकर लगातार बयान आ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकार की आपराधिक लापरवाही बताते हुए कहा कि हादसे में इन बच्चों की हत्या हुई है। उन्होंने कहा- सवाल सिर्फ स्कूल की छत गिरने और सिस्टम के ढहने का नहीं है। झालावाड़ के रोते-बिलखते परिवार और मां के आंसुओं पर जवाबदेही तय करने और नैतिक जिम्मेदारी से इस्तीफा देने का है।
उन्होंने कहा कि राज्य में अब भी हजारों स्कूल जर्जर हालत में संचालित हैं, जो कभी भी इस तरह के भयावह हादसों को जन्म दे सकते हैं। बच्चों की जिदंगी से खिलवाड़ करने वाले ये वो चुभते आंकड़ें हैं, जो भाजपा सरकार और शिक्षा विभाग की नाकामी पर कड़े सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि अकेले उदयपुर में 20 ऐसे स्कूल हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं।
धरने पर बैठे नरेश मीणा, अस्पताल के बाहर हंगामा
इधर निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा झालावाड़ में एआरजी अस्पताल के बाहर अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। इससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। मीणा ने कहा कि पूरा सिस्टम भ्रष्ट और चोर है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह को झालावाड़-बारां में घुसने न देने की चेतावनी भी दी। वसुंधरा राजे के अस्पताल पहुंचने से ठीक पहले पुलिस ने मीणा और उनके समर्थकों को वहां से हटाने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और नरेश मीणा और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया।