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Health News: प्रदेश की पहली पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब शुरू, अब सांप के काटने पर मिलेगा सटीक इलाज

Sat, 24 Jan 2026 12:26 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में प्रदेश की पहली और नॉर्थ इंडिया की पॉइजन डिटेक्शन ड्रग लेवल टॉक्सिकोलॉजी लैब शुरू हो गई है। इस लैब में मरीज के ब्लड, यूरिन और अन्य सैंपल से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस तरह का जहर शरीर में मौजूद है या किस जहरीले जानवर ने काटा है। इससे सटीक इलाज और एंटी-वेनम की सही मात्रा तय हो सकेगी, जिससे मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
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प्रदेश की पहली पॉइजन डिटेक्शन टॉक्सिकोलॉजी लैब शुरू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी जयपुर स्थित सबसे बड़े सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसएमएस अस्पताल में प्रदेश की पहली और नॉर्थ इंडिया की अत्याधुनिक पॉइजन डिटेक्शन ड्रग लेवल टॉक्सिकोलॉजी लैब की शुरुआत हो गई है। इस लैब की मदद से अब यह पता लगाया जा सकेगा कि मरीज ने किस प्रकार का जहर खाया है या उसे किस जहरीले जानवर ने काटा है, जिससे सटीक और समय पर इलाज संभव हो सकेगा। लैब के नोडल अधिकारी डॉ. डी. के. शर्मा ने बताया कि इस सुविधा के तहत मरीज के ब्लड, यूरिन, लार और बाल के सैंपल की जांच कर शरीर में मौजूद विषाक्त तत्वों की पहचान की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि मरीज को कौन-सी और कितनी दवा दी जानी चाहिए। अब तक मरीजों का इलाज केवल लक्षणों के आधार पर किया जाता था।

सांप काटने के मामलों में बड़ी राहत

डॉ. शर्मा के अनुसार, बारिश के मौसम में सांप काटने के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। राजस्थान में करैत, वाइपर और कोबरा के काटने के केस अधिक मिलते हैं। इस दौरान औसतन 25 से 30 मरीज रोजाना एसएमएस अस्पताल में पहुंचते हैं। नई लैब से अब यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को वास्तव में जहरीले सांप ने काटा है या नहीं।

एंटी-वेनम के अनावश्यक इस्तेमाल से बचाव

डॉ. शर्मा ने बताया कि फिलहाल सांप काटने पर एहतियातन करीब 10 वायल एंटी-वेनम दी जाती है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकती है।  डॉक्टर शर्मा का कहना है कि ऐसे में इस लैब से यह भी पता लग सकेगा कि जहरीले सांप ने काटा है या नहीं और उसी के अनुसार एंटी-वेनम और दूसरी दवाओं की मात्रा तय की जाएगी। इससे जान बचाने की संभावना और ज्यादा मजबूत होगी।  नई लैब से जांच के बाद एंटी-वेनम और अन्य दवाओं की सटीक मात्रा तय की जा सकेगी, जिससे मरीज की जान बचाने की संभावना और अधिक मजबूत होगी।
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