राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को फोन टैपिंग विवाद को लेकर सरकार का जवाब आ गया।शून्यकाल के बाद सरकार की तरफ से गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेडम ने बयान दिया। हालांकि, विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट हो गया। लेकिन फोन टैपिंग का बयान देने वाले मंत्री पर कार्रवाई की मांग को लेकर सदन से वाक आउट कर दिया।
बता दें कि इससे पहले बेडम ने सदन में कहा, फोन टैपिंग को लेकर कानून बना हुआ है। कानून में राज्य की सुरक्षा के लिए और लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कॉल इंटरसेप्शन के प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के संबंध में रिकॉर्ड और रक्षा उपाय नियम 2024 को उल्लेखित किया है। इस कानून में जो प्रावधान हैं, उनकी हमेशा कड़ाई से पालना की जाती है।
राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेडम बोले कि राज्य में इंटरसेप्शन की अनुमति के लिए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सक्षम अधिकारी हैं। पुलिस भी निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाले कॉल इंटरसेप्शन के प्रस्ताव देती है और इस पर सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश दिए जाते हैं। साथ ही ऐसे आदेश के रिव्यू के लिए मुख्य सचिव के अध्यक्षता में कमेटी बनी है। इसमें वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विधि विभाग के प्रमुख सचिव भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मीडिया के माध्यम से मंत्री किरोड़ीलाल मीणा का बयान संज्ञान में आया। इसमें उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बयान दिया कि सरकार उनका फोन टैप करवा रही है। इस बयान को लेकर विधानसभा में बवाल हो गया। कांग्रेस सरकार से इस संबंध में सदन में बयान देकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग रखी थी। हालांकि, किरोड़ीलाल मीणा बाद में अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने दोबारा बयान दिया कि मेरा फोन टैप नहीं किया गया। विधानसभा में सरकार का जवाब आने के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट है। लेकिन अगर फोन टैप नहीं हुआ और मंत्री गलत बयान कर रहे हैं तो मंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।