नवंबर तक प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं। सलूंबर और रामगढ़ के अलावा उपचुनाव के लिए प्रस्तावित पांच सीटों वो हैं, जहां के विधायक हाल ही हुए लोकसभा चुनाव में इंडी गठबंधन के टिकट पर सांसद बन गए हैं। इनमें खींवसर, झुंझुनूं, दौसा, देवली-उनियारा और चौरासी हैं। यूं तो चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दावेदारी शुरू हो गई है। कांग्रेस भी दावेदारों को लेकर लगातार बैठकें ले रही है। वहीं बीजेपी ने भी अपने पदाधिकारियों को एक-एक सीट का जिम्मा सौंप दिया है। बीजेपी के कई नेताओं ने अस्थाई रूप से उपचुनाव वाली विधानसभाओं में कैंपेनिंग शुरू कर दी है।
हरियाणा की हार के बाद गठबंधन में दरार
हरियाणा के नतीजे पक्ष में आने के बाद भाजपा राजस्थान में भी उपचुनावों को लेकर उत्साहित नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस की बात करें तो जिन दलों के साथ गठबंधन करके कांग्रेस लोकसभा चुनावों में मैदान में उतरी थी, अब वे दल उसे हरियाणा की हार के बाद ताने दे रहे हैं। हरियाणा में गठबंधन दलों को साथ नहीं लेकर चलने पर कांग्रेस की आलोचना हो रही है।
हनुमान बोले- अति-उत्साह और घमंड में हारी कांग्रेस
आरएलपी के नेता हनुमान बेनीवाल ने हरियाणा की हार के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि अति-उत्साह और घमंड तथा इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ने के कारण आज वहां कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने से वंचित हो गई।
वहीं चौरासी सीट के पूर्व विधायक और डूंगरपुर-बांसवाड़ा सीट से भारत आदिवासी पार्टी के मौजूदा सांसद राजकुमार रोत भी इस बार बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। इतना ही नहीं बीएपी इस बार दौसा और सलूंबर सीट पर भी अपनी दावेदारी कर रही है।