राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन को चुनौती देने वाली 60 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसीमन एक नीतिगत और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप से चुनाव प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है।
हाईकोर्ट की जयपुर पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति रवि चिरानिया शामिल थे, ने अपने निर्णय में कहा कि यदि प्रत्येक चुनाव से पहले परिसीमन को चुनौती दी जाने लगे तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और समय पर चुनाव कराना मुश्किल हो जाएगा। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति को किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि राजस्थान में पंचायत चुनाव 15 अप्रैल तक कराए जाएं। ऐसे में इस समय पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना चुनावी प्रक्रिया को बाधित करेगा।
ये भी पढ़ें: Dausa: राशन डीलरशिप नहीं मिलने पर भाजपा मंडल अध्यक्ष के पति ने दी सुसाइड की धमकी, फेसबुक पोस्ट से मचा हड़कंप
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने भी राजस्थान में पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया को हरी झंडी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने एक गांव के निवासियों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया था।
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यव्यापी परिसीमन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने और सभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 15 अप्रैल तक कराने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब राज्य में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।